सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट
Saraikela Holi Celebration: सरायकेला में इस बार होली का रंग कुछ खास नजर आया. नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने पारंपरिक जश्न से अलग हटकर वृद्धाश्रम में जाकर बुजुर्गों के साथ त्योहार मनाया. उनके इस कदम ने न केवल सामाजिक संदेश दिया, बल्कि वहां मौजूद वृद्धजनों के चेहरों पर सच्ची मुस्कान भी बिखेर दी.
परिवार संग पहुंचे अध्यक्ष, अबीर-गुलाल से दी शुभकामनाएं
मनोज कुमार चौधरी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वृद्धाश्रम पहुंचे. उन्होंने एक-एक कर सभी वृद्धजनों को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी. जैसे ही रंगों का स्पर्श बुजुर्गों के चेहरे पर पड़ा, उनके चेहरे खुशी से खिल उठे. लंबे समय बाद किसी जनप्रतिनिधि को अपने बीच पाकर वे भावुक भी नजर आए. वृद्धजनों ने मनोज चौधरी को आशीर्वाद देते हुए उनकी जीत की बधाई दी. उन्होंने कहा कि समाज की सेवा के इस भाव को वे आगे भी कायम रखें और क्षेत्र की तरक्की के लिए निरंतर कार्य करते रहें.
मिठाई और संवाद से बढ़ा अपनापन
होली के इस मौके पर अध्यक्ष ने वृद्धजनों के बीच मिठाई, बिस्कुट और शीतल पेय का वितरण भी किया. लेकिन यह कार्यक्रम सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा. मनोज चौधरी ने सभी बुजुर्गों के साथ बैठकर हालचाल पूछा और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना. कई वृद्धजनों ने स्वास्थ्य, दवाइयों और नियमित देखभाल से जुड़ी अपनी परेशानियां साझा कीं. अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि वे इन मुद्दों पर गंभीरता से पहल करेंगे और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे.
“वृद्धजन समाज के स्तंभ हैं” – मनोज चौधरी
इस अवसर पर मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि वृद्धजनों की सेवा करना उनका कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्ग समाज के स्तंभ हैं, जिनके अनुभव और आशीर्वाद से ही समाज आगे बढ़ता है. ऐसे में उनका सम्मान और देखभाल हर नागरिक की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा कि त्योहार केवल रंग और उत्सव का नाम नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक है. अगर हम अपने बुजुर्गों के साथ समय बिताएं, तो वही सच्ची होली होगी.
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सामाजिक संदेश के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम में अध्यक्ष की पत्नी, बच्चे और कई समाजसेवी भी उपस्थित रहे. सभी ने मिलकर बुजुर्गों के साथ समय बिताया और त्योहार की खुशियां साझा कीं. नगर पंचायत अध्यक्ष की इस पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है. लोगों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को इसी तरह समाज के हर वर्ग से जुड़कर काम करना चाहिए. इस पहल ने यह संदेश दिया कि रंगों का असली अर्थ रिश्तों में अपनापन और संवेदनशीलता जगाना है.
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