Saraikela Elephant Attack, सरायकेला (हिमांशु गोप): सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित नीमडीह प्रखंड अंतर्गत डिटार-वनघर गांव में बुधवार की मध्यरात्रि एक जंगली हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. झुंड से बिछड़कर रिहायशी इलाके में घुसे इस हाथी ने न केवल घरों को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि ग्रामीणों के बीच भारी दहशत पैदा कर दी. हाथी के अचानक हमले से गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे. पूरी रात ग्रामीण हाथों में मशालें और लाठियां लेकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पहरा देते रहे.
चार घरों को किया ध्वस्त, साल भर की पूंजी चट की
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाथी ने वनघर निवासी राधानाथ महतो, हरिपद महतो, कृष्णपद महतो और मिलन महतो के घरों को अपना निशाना बनाया. विशालकाय गजराज ने इन घरों की दीवारों को तोड़कर उन्हें पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. घर के भीतर रखे धान और अन्य अनाजों को भी हाथी ने खाकर और रौंदकर बर्बाद कर दिया, जिससे इन गरीब परिवारों के सामने अब भोजन का संकट खड़ा हो गया है. पीड़ित परिवारों का कहना है कि साल भर की मेहनत की कमाई इस एक रात के तांडव में मिट्टी में मिल गई है.
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ग्रामीणों के अदम्य साहस से टला बड़ा हादसा
हाथी के उग्र स्वभाव को देखते हुए ग्रामीणों ने सूझबूझ और साहस का परिचय दिया. पूरे गांव ने एकजुट होकर शोर मचाया और टीन के डिब्बे पीटकर हाथी को डराने की कोशिश की. गुरुवार की सुबह तक यह जद्दोजहद चलती रही. अंततः सामूहिक प्रयासों के बाद हाथी को गांव की सीमा से बाहर खदेड़ने में सफलता मिली और वह वापस घने जंगल की ओर लौट गया. तब जाकर ग्रामीणों ने चैन की सांस ली, हालांकि गांव में अब भी हाथी के दोबारा लौटने की आशंका को लेकर भय बना हुआ है.
मुआवजे की मांग और प्रशासन की भूमिका
घटना के पश्चात आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि जंगली हाथियों के हमले की जानकारी होने के बावजूद विभाग द्वारा सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए जाते हैं. ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि प्रभावित परिवारों के नुकसान का तत्काल आकलन किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाए. साथ ही, गांव के आसपास गश्त बढ़ाने की भी अपील की गई है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जनहानि को टाला जा सके.
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