चांडिल में तीन अलग-अलग रथों पर सवार होकर मौसीबाड़ी पहुंचेंगे प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व बहन सुभद्रा

चांडिल में 16 जुलाई को होने वाली प्रभु जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं. 14 जुलाई को नेत्र उत्सव पर भक्त नवयौवन रूप में दर्शन पाएंगे. यह विख्यात रथ यात्रा नागा संन्यासियों द्वारा आयोजित की जाती है.

जिला मुख्यालय सरायकेला से करीब 50 किमी दूर चांडिल में आषाढ़ शुक्ल द्वितीय के दिन प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र व बहन देवी सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकलेगी. चांडिल में तीन अलग अलग रथों पर सवार हो कर प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा सवार होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे. चांडिल स्थित श्री साधु बांध मठिया दशनामी नागा संन्यासी आश्रम से स्टेशन रोड़ स्थित गुंडिचा मंदिर तक प्रभु की रथ यात्रा निकलेगी. यहां 16 जुलाई को होने वाली रथ यात्रा की तैयारी जोरों पर चल रही है. 16 जुलाई को सबसे पहले नंदीघोष रथ पर सवार हो कर भगवान जगन्नाथ जी, बीच में देवदलन नामक रथ पर बहन देवी सुभद्रा जी व तालध्वज नामक रथ पर भगवान बलभद्र जी (बलराम) मौसीबाड़ी गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे. चांडिल की रथा यात्रा पूरे क्षेत्र में विख्यात है. रथ यात्रा में शामिल होने यहां दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं.

14 को नेत्र उत्सव पर भक्तों को देंगे दर्शन

प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्र का नेत्र उत्सव 14 जुलाई को होगी. इस दिन प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्र भक्तों को नव यौवन रुप में दर्शन देंगे. धार्मिक परंपरा के अनुसार चार जून को देवस्नान पूर्णिमा पर स्नान यात्रा के बाद अब महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा बीमार हो गए हैं. उन्हें निरोग करने के लिए 14 दिन के एकांतवास में रखा गया है तथा उनका जड़ी-बूटी से इलाज शुरू हो गया है. चांडिल स्थित श्री साधु बांध मठिया दशनामी नागा संन्यासी आश्रम में रथ यात्रा को लेकर सभी परंपराओं का निर्वाहन किया जा रहा है.

नागा सन्यासियों द्वारा की जाती है रथ यात्रा का आयोजन

चांडिल में आयोजित होने वाले रथ यात्रा की सबसे खास बात है कि यहां नागा संन्यासियों द्वारा रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है. वैसे तो चांडिल स्थित श्रीसाधु बांध मठिया दशनामी नागा सन्यासी आश्रम से निकाले जाने वाला रथ यात्रा अंग्रेजी शासन के समय शुरू हुआ था. उस समय एक ही रथ निकलती थी. वर्ष 1980 से जगन्नाथ पुरी (ओड़िशा) के तर्ज पर मठ के ब्रह्मलीन महंत परमानंद सरस्वती ने तीन अलग-अलग रथों पर प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का रथ यात्रा निकालने की परंपरा शुरू की. इसके पूर्व एक ही रथ पर सवार होकर महाप्रभु अपने बड़े भाई और बहन के साथ मौसीबाड़ी जाते थे. वर्तमान में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत श्री विद्यानंद सरस्वती के दिशा निर्देशन में यहां भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है. अब जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत विद्यानंद सरस्वती ने यहां की रथ यात्रा को नया मुकाम देने का काम किया.

रथयात्रा की तैयारियां जोरों पर

चांडिल स्थित श्रीसाधु बाध मठिया नागा संनयासी आश्रम में रथ यात्रा को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है. रथों को मरम्मत करने के साथ रंग रोगन का काम जोर-शोर से चल रहा है. रथा यात्रा के दौरान अस्थाकी ड़ोर खींचने के लिये बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे. आम से लेकर खास लोग यहां प्रभु जगन्नाथ के रख को खींच कर जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाते है. रथयात्रा को लेकर तैयारी लगभग पूरी हो गई हैं. 14 को प्रभु जगन्नाथ जी का नवजीवन दर्शन होगा. उसमें विशेष पूजा पाठ, आरती के बाद प्रसाद वितरण होगी. 16 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ जी बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा जी की रथयात्रा निकाली जाएगी. महंत इंद्रानंद सरस्वती जी, श्री साधु बांध मठिया चांडिल.


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Author: Himanshu gope

Published by: Priya Gupta

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