खरसावां. पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी (बिंज) स्थित उद्यान महाविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने वर्ष 2025 में इस महाविद्यालय को मान्यता दे दी है. इस मंजूरी के बाद अब यह संस्थान राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित हो गया है, जिससे झारखंड के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के छात्र भी यहां दाखिला ले सकेंगे. अगले शैक्षणिक सत्र से अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की पूरी उम्मीद है.आइसीएआर की मान्यता मिलने से कॉलेज की शैक्षणिक गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है.
मानकीकृत पाठ्यक्रम:
देशभर में लागू मानक शिक्षा पद्धति.
आधुनिक अनुसंधान:
अत्याधुनिक लैब और रिसर्च की सुविधाएं.
छात्रवृत्ति:
छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की छात्रवृत्तियों का लाभ मिल सकेगा.
उच्च शिक्षा:
राष्ट्रीय संस्थानों में उच्च शिक्षा (एमएससी/पीएचडी) के बेहतर अवसर.
पाठ्यक्रम और विशेषज्ञ शिक्षक
महाविद्यालय में वर्तमान में चार वर्षीय बीएससी (प्रतिष्ठा) उद्यान विज्ञान पाठ्यक्रम संचालित है, जो 8 सेमेस्टर में विभाजित है. वर्तमान में यहां 17 विशेषज्ञ शिक्षक पदस्थापित हैं. यहां छात्रों को फल एवं सब्जी विज्ञान, पुष्प विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, कीट विज्ञान, मृदा विज्ञान और पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी जैसे विषयों की गहन जानकारी दी जाती है. सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ-साथ प्रायोगिक और क्षेत्रीय प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जाता है. महाविद्यालय में फिलहाल 134 छात्र अध्ययनरत हैं. अब तक यहां से चार बैच उत्तीर्ण हो चुके हैं, जो सरकारी और निजी क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
दाखिला प्रक्रिया:
बीएससी. (उद्यान) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का 10 2 (विज्ञान वर्ग) से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है. दाखिला झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा बोर्ड द्वारा व मेरिट लिस्ट के आधार पर होता है. अब आइसीएआर कोटा के तहत भी सीटें भरी जा सकेंगी.
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