Jharkhand Kumhar Mahasangh Meeting, सरायकेला, (शचिंद्र कुमार दाश): आदिम कुम्हार महासंघ झारखंड प्रदेश समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक सरायकेला-खरसावां में आयोजित की गयी. बैठक में केंद्रीय और जिला समिति के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया. इस दौरान समाज से जुड़े शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर गंभीर मंथन किया गया और आगे की रणनीति तय की गयी. महासंघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुधीर कुंभकार ने झारखंड सरकार से जाति सूची में प्रजापति के स्थान पर कुम्हार शब्द को शामिल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि वर्ष 1956 की जाति सूची में कुम्हार शब्द दर्ज था, जिसे बाद में हटा दिया गया. इसे फिर से शामिल किया जाना चाहिए. इसके अलावा कुम्हार जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की भी मांग की गयी. उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों को लेकर आदिम कुम्हार महासंघ आंदोलन के रास्ते आगे बढ़ेगा.
सरकार से माटीकला बोर्ड का गठन करने की मांग
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय कोषाध्यक्ष सत्येंद्र कुम्हार ने कहा कि राज्य में वर्षों से माटीकला बोर्ड का गठन नहीं किया गया है. बोर्ड का गठन कर स्थानीय कुम्हार समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए. महासंघ के सलाहकार डॉ. सरोज कुमार चौधरी ने कहा कि झारखंड क्षेत्र में छह हजार वर्षों से अधिक समय से रह रहे कुम्हार समाज के लोग आज भी उपेक्षा के शिकार हैं. कुम्हार समाज हमेशा सभी वर्गों के सुख-दुख में भागीदारी निभाता रहा है, इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया. बैठक में सुधीर कुंभकार, डॉ. सरोज कुमार चौधरी, सत्येंद्र कुम्हार, सुखदेव कुम्हार, सोनाराम कुम्हार, कोंदो कुंभकार, रविंद्र कुंभकार, बुधन लाल कुंभकार, छोटेलाल कुंभकार, रथो कुंभकार, मंगल कुंभकार, विरेंद्र कुंभकार, जोगा कुंभकार सहित कई पदाधिकारी और समाज के लोग उपस्थित थे.
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प्रखंड और जिलाध्यक्षों की घोषणा
बैठक के दौरान महासंघ के केंद्रीय अध्यक्ष ने प्रखंड और जिला स्तर के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की. सुखदेव कुमार को सरायकेला-खरसावां जिला का अध्यक्ष और सोनाराम कुम्हार को पश्चिमी सिंहभूम जिला अध्यक्ष बनाया गया. शंशांक भकत को केंद्रीय उपाध्यक्ष, शरद कुम्हार को सरायकेला जिला कोषाध्यक्ष, दीनबंधु कुम्हार को गम्हरिया प्रखंड अध्यक्ष और आनंद कुम्हार को सचिव, शंभू कुंभकार को सरायकेला प्रखंड अध्यक्ष, कोंदो कुंभकार को खरसावां प्रखंड अध्यक्ष और रामचरण कुम्हार को कुचाई प्रखंड अध्यक्ष चुना गया. प्रखंड समितियों का शीघ्र विस्तार कर समाज को संगठित करने पर जोर दिया गया.
मिट्टी शिल्प को पुनर्जीवित करने की मांग
बैठक में सरकार से कुम्हार समाज के पुस्तैनी मिट्टी शिल्प व्यवसाय को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गयी. समाज की ओर से कहा गया कि चाक और मिट्टी शिल्प का मानव सभ्यता से गहरा संबंध रहा है, लेकिन आज यह व्यवसाय लगभग समाप्त हो चुका है. महासंघ के सदस्यों ने कुम्हारों को प्रति माह पांच हजार रुपये की पेंशन के साथ साथ माटीकला के लिए बाजार उपलब्ध और उपयुक्त मिट्टी व पाकशाला निर्माण के लिए जमीन तथा जलावन की व्यवस्था करने की मांग की है. इसके साथ ही ईंट, टाइल्स, एस्बेस्टस शीट आदि निर्माण के लिए लाइसेंस, बिक्री के लिए बाजार में शेड, प्रत्येक कुम्हार परिवार को 40 प्रतिशत अनुदान के साथ दस लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा तथा शिक्षा को बढ़ावा देने की भी मांग उठाई गयी. बैठक में यह भी बताया गया कि कुम्हार समाज में दहेज प्रथा नहीं है और इसे आगे भी बनाए रखने पर सभी ने एकमत से सहमति जताई.
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