शचींद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड के बुरुडीह पंचायत के देवली गांव में रजो संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक घट यात्रा और वार्षिक छऊ नृत्य का भव्य आयोजन किया गया. स्थानीय परंपरा के अनुसार गांव के पास स्थित संजय नदी से श्रद्धालुओं ने शुभ घट, माथा घट, यात्रा घट और गरिया भार निकालकर मंदिर परिसर में स्थापित किया. कालिका घट के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हुआ. मां काली को समर्पित कालिका घट यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने अलग-अलग स्थानों पर शक्ति स्वरूपा की पूजा-अर्चना की. ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच निकली यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर घट यात्रा का स्वागत किया. सभी धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूरे हुए. गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की.
पांच गांवों के कलाकारों ने छऊ नृत्य से बांधा समां
देवली के शिव मंदिर परिसर में वार्षिक छऊ नृत्य कार्यक्रम में वार्षिक छऊ नृत्य का भी आयोजन किया गया. इस दौरान देवली के पांच गांवों के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. ब्राह्मणसाई के कलाकारों ने कृष्ण-सुदामा, शिव-पार्वती, लव-कुश और बालि वध जैसे पौराणिक प्रसंगों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किए. कवाटसाई के कलाकारों ने किसान और दामिनी नृत्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन को दर्शाया. तांतीसाई के कलाकारों ने भक्त प्रह्लाद की कथा को नृत्य के माध्यम से प्रदर्शित किया, वहीं पोटका के कलाकारों ने शिकारी और गुवाबेड़ा के कलाकारों ने सीताहरण नृत्य प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी. इसके अलावा अन्य कई आकर्षक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया.
वर्षों से चली आ रही है परंपरा
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1935 से लगातार देवली गांव में रज संक्रांति के अवसर पर छऊ नृत्य और घट-पाट यात्रा का आयोजन किया जा रहा है. इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन को देखने के लिए क्षेत्र के अलग-अलग गांवों समेत दूर-दराज से हजारों श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के पहुंचते है. भक्ति, संस्कृति और लोक परंपराओं के अद्भुत संगम के बीच आयोजन ने क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया. इस दौरान मुख्य रुप से मंदिर के पूजारी प्रदीप सतपथी, जयदेव कवाट, गोपाल सतपथी, हेमंत नायक, पवित्र तांती, गणेश नायक, जेना दिग्गी, विजय दिग्गी समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे.
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