करम डाली के नीचे सजा जावा, मांदर-नगाड़े की थाप पर देर रात तक थिरके कदम

सरायकेला में धूमधाम से मनाई गई करम पूजा. गणेश महाली ने परिवार संग की पूजा-अर्चना, क्षेत्र की खुशहाली की कामना. पारंपरिक रीति-रिवाज और उल्लास का संगम.

सरायकेला : प्रकृति, भाई-बहन के प्रेम और सुख-समृद्धि का पर्व करम पूजा मंगलवार को सरायकेला-खरसावां जिले में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. सरायकेला विधानसभा क्षेत्र के झामुमो प्रत्याशी रहे गणेश महाली के सालडीह स्थित पैतृक आवास पर भी करम महोत्सव का आयोजन हुआ. गणेश महाली ने सपरिवार पूजा में हिस्सा लिया और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ करम राजा की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की.

करम डाली के नीचे स्थापित किया गया जावा

करम पूजा को लेकर गणेश महाली के पैतृक आवास के आंगन में विधि-विधान से करम डाली स्थापित की गयी. पूजा से दो दिन पूर्व व्रतियों द्वारा जावा लाया गया था. करम डाली के नीचे जावा स्थापित कर व्रतियों ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की. इस दौरान मुख्य पुजारी ने करमू-धरमू दो भाइयों की कथा सुनायी और करम पर्व की धार्मिक मान्यता के साथ करम राजा के महत्व पर प्रकाश डाला.

पूजा के बाद मांदर-नगाड़े की थाप पर करम नृत्य

पूजा के दौरान गणेश महाली ने श्रद्धालुओं के साथ करम देवता की आराधना की. उन्होंने क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की. पूजा संपन्न होने के बाद वे ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के साथ मांदल व नगाड़े की थाप पर करम नृत्य में भी शामिल हुए. पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य से पूरा माहौल उत्सवी हो गया.

देर रात तक चलता रहा गीत और नृत्य

करम महोत्सव में झामुमो कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए. पूजा के बाद देर रात तक करम गीत और नृत्य का दौर चलता रहा. पारंपरिक गीतों और मांदल-नगाड़े की गूंज के बीच ग्रामीण करम पर्व की खुशियां मनाते रहे. पूरे आयोजन में आदिवासी परंपरा, लोक संस्कृति और सामूहिक उत्सव का रंग देखने को मिला.

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लेखक के बारे में

By प्रताप कुमार मिश्रा

प्रताप कुमार मिश्रा वर्ष 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने कोल्हन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, खेल की खबरों में इन्हें विशेषज्ञता हासिल है. डिजिटल जर्नलिज्म में 10 साल का अनुभव है.

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