झारखंड आंदोलनकारियों की हुंकार, 1932 की स्थानीय नीति से सम्मान राशि तक उठीं 6 बड़ी मांगें

झारखंड आंदोलनकारियों ने 1932 आधारित स्थानीय नीति और सम्मान राशि बढ़ाने समेत छह सूत्री मांगों को लेकर सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है.

चांडिल : चांडिल के एक होटल में मंगलवार को झारखंड आंदोलनकारियों ने अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर बैठक की. इसमें आंदोलनकारियों ने झारखंडियों के हित में 1932 आधारित स्थानीय और नियोजन नीति लागू करने, पेसा कानून-1996 के 23 प्रमुख प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने समेत कई मांगें रखी हैं.

आंदोलनकारियों ने समर्पित किया अपना जीवन

इस दौरान बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड आंदोलनकारी धनपति सरदार ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए आंदोलनकारियों ने अपना जीवन और समय समर्पित किया. आंदोलन के दौरान कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, परिवार उजड़े और महिलाओं को विधवा होना पड़ा. राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारी और उनके परिवार विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं.

नियोजन नीति प्रभावी रूप से लागू करने की मांग

धनपति सरदार ने कहा - राज्य सरकार से हमारी मांग है कि जिले के अंतिम सर्वे सेटलमेंट को आधार बनाकर 1932 आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गयी है, ताकि झारखंडियों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिल सके. वहीं, पेसा नियमावली-2025 में संशोधन कर पेसा कानून के 23 प्रमुख प्रावधानों को लागू करने और ग्राम सभाओं को उनके संवैधानिक अधिकार देने की मांग की गयी है.

आंदोलनकारियों की सम्मान राशि बढ़ाने की मांग

उन्होंने कहा - झारखंड आंदोलनकारीयो की सम्मान राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने और प्रत्येक आंदोलनकारी के एक आश्रित को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी देने की मांग की है. उन्होंने कहा - पश्चिमी सिंहभूम के मुफस्सिल थाना केस संख्या 73/89 के संदर्भ में आंदोलनकारी चिह्नितीकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग भी की गयी है. साथ ही वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, वन विभाग के पदाधिकारियों पर अंकुश लगाने और झारखंड में अगले 50 वर्षों तक भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग की गयी है.

मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग

धनपति सरदार ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर दो माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है. कार्रवाई नहीं होने पर नवंबर से झारखंडियों के न्याय, मान-सम्मान और हक-अधिकार के लिए आंदोलनकारी आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे.

मौके पर ये थे मौजूद

मौके पर धनपति सरदार, योगेश्वर बेसरा, बिजली मांझियान, सोनाराम सोरेन, सुखलाल हेंब्रम, वीरेंद्र पड़ेया, पुलक सतपति, तारापदों महतो, मोहन गोप, शांति प्रधान, मृत्युंजय किस्कू, सोमचांद मांझी, भगत बेसरा, सोमचंद सिंह सरदार, दुर्गा हो, राजेश मुंडारी, लखन मांदुइया आदि उपस्थित थे.

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By Himanshu gope

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