100 साल से रह रहे 90 परिवारों को सीनी दलित बस्ती खाली करने का अल्टीमेटम, लोग परेशान

Indian Railways Ultimatum to Sini Dalit Basti: रेलवे ने सरायकेला-खरसावां जिले के सीनी रेलवे स्टेशन के पास स्थित 100 साल पुरानी दलित बस्ती को 15 दिन में खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है.

Indian Railways Ultimatum to Sini Dalit Basti: सीनी (सरायकेला-खरसावां), शचिंद्र कुमार दाश/ प्रताप मिश्रा : सरायकेला-खरसावां जिले के सीनी रेलवे स्टेशन के समीप स्थित दलित बस्ती को खाली करने का अल्टीमेटम रेलवे ने दे दिया है. रेलवे ने इन परिवारों को नोटिस जारी करते हुए बस्ती को 15 दिन के अंदर खाली करने के लिए कहा है. रेलवे ने कहा है कि अगर 15 दिनों के अंदर बस्ती को खाली नहीं किया, तो रेलवे अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर पूरी बस्ती को खाली करवायेगा. रेल विभाग की ओर से नोटिस मिलने के बाद बस्ती के लोग डरे हुए हैं और उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की है कि इससे पहले कि रेलवे उनको बस्ती से बेदखल कर दे, उनके लिए प्रशासन जमीन की व्यवस्था करे.

सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त कार्यालय पहुंचे दलित बस्ती के लोग.

बस्तीवासियों ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

बस्तीवासियों ने जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा और जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सरदार के नेतृत्व में डीसी ऑफिस पहुंचकर उपायुक्त से गुहार लगायी है कि उनके पुनर्वासन की व्यवस्था की जाये. इन्होंने डीसी से अपील की है कि उनके रहने के लिए कहीं जमीन की व्यवस्था की जाये. इस संबंध में बस्तीवासियों ने एक ज्ञापन भी सौंपा है. सोनाराम बोदरा ने जिला प्रशासन और रेलवे से अपील की है कि दोनों मिलकर बीच का रास्ता निकालें, ताकि दलित बस्ती के लोग बेघर न हों.

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बंदोबस्ती में भूमिहीनों को जमीन दे जिला प्रशासन – लोगों की मांग

उपायुक्त को सौंपे गये ज्ञापन में बस्ती के लोगों ने कहा है कि 100 साल से रेलवे की जमीन पर भूमिहीन परिवार रह रहे हैं. अधिकांश परिवार साफ-सफाई और दैनिक मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं. इससे पहले वर्ष 2018 में रेलवे ने ऐसा ही नोटिस दिया था. तब भूमिहीन परिवारों को जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि उन्हें 4-4 डिसमिल जमीन दी जायेगी.

कोरोना की वजह से ठंडे बस्ते में चला गया था बंदोबस्ती का मामला

ग्रामीणों ने कहा कि कोरोना संक्रमण जैसी महामारी की वजह से मामला ठंडे बस्ते में चल गया. अब फिर से रेलवे ने नोटिस भेज दिया है. अगर रेलवे ने उनकी बस्ती उजाड़ दी और उन्हें वहां से हटने के लिए मजबूर कर दिया, तो 90 परिवार बेघर हो जायेंगे. उनका आशियाना छिन जायेगा. इसलिए समय रहते प्रशासन पहल करे और उनकी मदद करे.

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जिला परिषद अध्यक्ष बोले- बीच का रास्ता निकाले प्रशासन-रेलवे

सरायकेला-खरसावां के जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा है कि इन गरीब भूमिहीन परिवारों का आशियाना उजड़ न जाये, इसके लिए जिला प्रशासन बीच का रास्ता निकाले. ऐसा कुछ करे, ताकि इन्हें बेघर न होना पड़े.

‘दलित बस्ती के लोगों के लिए जमीन की बंदोबस्ती करे प्रशासन’

वहीं, सरायकेला प्रखंड की जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सरदार ने कहा है कि जिला प्रशासन ने पहले इन लोगों को जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था. प्रशासन भूमिहीन लोगों की जमीन बंदोबस्ती कराये, ताकि इन्हें बेघर न होना पड़े.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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