स्वास्थ्य विभाग के मिशन डायरेक्टर पहुंचे सरायकेला

सरायकेला में स्वास्थ्य मिशन डायरेक्टर ने मलेरिया की स्थिति की समीक्षा की। जांच का दायरा बढ़ाने और झोलाछाप डॉक्टरों से सावधान रहने के दिए निर्देश।

सरायकेला: स्वास्थ्य विभाग के मिशन डायरेक्टर शशि प्रकाश झा बुधवार को सरायकेला पहुंचे. यहां उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में जिले में मलेरिया की स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक की. बैठक में सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. सुजीत मुर्मू सहित जिला और प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य पदाधिकारी शामिल हुए.

सामान्य बुखार के मरीजों की भी हो जांच

बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ सुजीत मुर्मू ने बताया की मिशन डायरेक्टर के द्वारा जिले में मलेरिया के प्रभाव, जांच की स्थिति और उपचार की तैयारियों का जायजा लिया गया. उन्होंने जिले में मलेरिया जांच का दायरा बढ़ाने का निर्देश देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर मलेरिया जांच शिविर का आयोजन करने की बात कही.कहा कि सामान्य बुखार की शिकायत लेकर आने वाले हर मरीज की अनिवार्य रूप से मलेरिया जांच की जाए, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान और इलाज संभव हो सके.उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि जिला स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना है कि मलेरिया से पीड़ित पाए जाने वाले शत प्रतिशत मरीजों को दवाई उपलब्ध कराया जाए.

प्रत्येक फील्ड लेवल वर्कर को करना है एक सौ जांच

डॉ मुर्मू ने बताया कि जिला में मलेरिया उन्मूलन को लेकर डायरेक्टर के द्वारा कई आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया.इसमें मुख्य रूप से मलेरिया जांच पर विशेष जोर दिया गया है.उन्होंने कहा कि डायरेक्टर के द्वारा जिले के सभी फील्ड लेवल वर्कर के लिए जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.इसके तहत प्रत्येक वर्कर को प्रति माह एक सौ ब्लड सैंपल का जांच करना है.निर्धारित लक्ष्य से कम जांच करने वाले वर्कर का डायरेक्टर ने वेतन निकासी पर रोक लगाने का निर्देश दिया है.

झोलाछाप डॉक्टर से रहे सावधान

बैठक के दौरान डायरेक्टर ने पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया के कारण हुई मौत पर खेद जताते हुए कहा कि मलेरिया के ऐसी गंभीर स्थिति में पहुंचने का अहम कारण झोलाछाप डॉक्टर हैं.उन्होंने कहा कि गांव के लोग अकसर कोई भी बीमारी होने पर पहले झोलाछाप डॉक्टर से संपर्क करते हैं.ये डॉक्टर बिना किसी जांच के मरीजों को दवाई दे देते हैं जो गंभीर स्थिति को उत्पन्न करता है.

जिला के चार प्रखंड डेंजर जोन में शामिल

बैठक के दौरान जिला मलेरिया पदाधिकारी द्वारा डायरेक्टर को जानकारी दिया गया कि जिला में चार प्रखंड मलेरिया से सबसे आधीक ग्रसित है.इसमें कुचाई,खरसावां,राजनगर एवं सरायकेला प्रखंड शामिल है.डायरेक्टर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में जागरूकता की कमी के कारण ये लोग झोलाछाप डॉक्टर के प्रभाव में आ जाते हैं.उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को उक्त चारों प्रखंड के सभी पंचायत के मुखिया एवं गांव के मुंडा के साथ बैठक कर मलेरिया से संबंधित जानकारी देने का निर्देश दिया.ताकि मुखिया और मनकी,मुंडा ग्रामीणों को जागरूक करेंगे और किसी प्रकार की स्वास्थ शिकायत होने पर स्वास्थ्य केंद्र के परामर्श से ही दवा खाने की सलाह देंगे.डायरेक्टर ने सभी अधिकारियों को स्कूली बच्चों का मलेरिया जांच करने का निर्देश दिया.

3 माह तक मिशन मोड में काम करे विभाग

बैठक के दौरान मिशन डायरेक्टर ने सभी अधिकारियों को तीन माह तक मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया.इसके तहत मलेरिया की जांच और संक्रमित को अनिवार्य रूप से दवाई उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.उन्होंने कहा कि अगर उक्त चारों प्रखंड में मैन पावर की कमी है तो उपायुक्त के माध्यम से दूसरे प्रखंडों से स्वास्थ्य कर्मियों का प्रतिनियोजन कराकर काम लेने की बात कही.उन्होंने जिले के सभी प्रखंडों में निश्चित रूप से डीडीटी का छिड़काव करने का निर्देश दिया.छिड़काव के समय किसी के द्वारा कर्मियों पर छिड़काव ना करने का दबाव बनाया जाता है तो ऐसी परिस्थिति में पुलिस को इसकी सूचना देने की बात कही.

सदर अस्पताल का किया निरीक्षण

बैठक के बाद मिशन डायरेक्टर ने सदर अस्पताल सरायकेला का निरीक्षण किया. सदर अस्पताल में उन्होंने मलेरिया जांच की प्रक्रिया देखी और इंडोर में भर्ती मरीजों के इलाज व सुविधाओं की जानकारी ली.मलेरिया से ग्रसित मरीजों से मिलकर उन्होंने उनका हाल चाल जाना और उपचार से संबंधित जानकारी लिया.मौके पर अस्पताल प्रबंधक संजीत राय के साथ चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे.



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Author: Dheeraj Singh

Published by: Sweta Vaidya

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