संवाददाता, खरसावां. हरिभंजा की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष केवल आस्था के कई रंग देखने को मिले. भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान पश्चिम ओड़िशा के प्रसिद्ध घंट एवं घुमुरा नृत्य ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया. रथयात्रा के दौरान बोलांगीर (ओड़िशा) से पहुंचे करीब 80 सदस्यीय घंट एवं घुमुरा नृत्य दल ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति दी. पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने घंट, घुमुरा और अन्य लोक वाद्ययंत्रों की लय पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. रथ के आगे-आगे चल रही इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. जय जगन्नाथ के जयघोष, संकीर्तन और लोक वाद्यों की धुन पर श्रद्धालु भी झूमते नजर आए. रथयात्रा में भक्ति, लोक संस्कृति और पारंपरिक कला का अनूठा संगम देखने को मिला.
झारखंड और ओड़िशा की साझा सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक पूरे आयोजन में दिखाई दी. बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लिया और उनकी कला की सराहना की. श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ की भक्ति के साथ-साथ पश्चिम ओड़िशा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से भी परिचित होने का अवसर मिला है. उल्लेखनीय है कि घुमुरा नृत्य ओड़िशा की प्राचीन लोकनृत्य परंपराओं में शामिल है. अपनी विशिष्ट वेशभूषा, ताल-लय और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के कारण यह नृत्य देशभर में विशेष पहचान रखता है. हरिभंजा की रथयात्रा में इसकी प्रस्तुति इस बार श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा आकर्षण साबित हुई.
