चांडिल. दलमा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों में ग्रामसभा की उपेक्षा किए जाने को लेकर ग्राम सुरक्षा मंच कोल्हान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. मंच के केंद्रीय सचिव सुकलाल पहाड़िया ने प्रशासन और वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना दलमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विकास कार्य किया जाना संविधान और पेसा कानून का सीधा उल्लंघन है.
अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामसभा सर्वोच्च फिर भी अनदेखी:
सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि दलमा क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां ग्रामसभा सर्वोच्च इकाई है. इसके बावजूद सड़क निर्माण, पर्यटन ढांचे का विकास, भवन निर्माण सहित अन्य योजनाओं को ग्रामसभा की सहमति के बिना आगे बढ़ाया जा रहा है, जो स्थानीय आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है.
ग्रामसभा को विश्वास में नहीं लिया गया, तो होगा आंदोलन :
ग्राम सुरक्षा मंच कोल्हान ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन की ओर से ग्रामसभा को विश्वास में लेकर विकास कार्य नहीं किए गए, तो व्यापक आंदोलन और जनप्रतिरोध किया जाएगा. साथ ही सुकलाल पहाड़िया ने राज्य सरकार से मांग की है कि दलमा क्षेत्र में चल रहे सभी विकास कार्यों की तत्काल समीक्षा की जाए और जबतक ग्रामसभा से लिखित सहमति प्राप्त नहीं हो जाती, तबतक सभी कार्यों पर तत्काल रोक लगायी जाए.
विकास के नाम पर जमीन, जंगल और अस्मिता पर हमला
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर दलमा की जमीन, जंगल और आदिवासी अस्मिता को समाप्त करने की साजिश की जा रही है. ग्रामसभा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि इन योजनाओं के संबंध में न तो स्थानीय ग्रामीणों को कोई जानकारी दी गयी और न ही उनकी राय ली गयी, जिससे क्षेत्र में असंतोष और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है.