Saraikela News: टूटती छत, रिसती दीवारें बनीं खतरे की घंटी

खरसावां. राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय के आदिवासी छात्रावास का हाल, क्लासरूम बना आश्रय, मुश्किलों के बीच पढ़ रहे बच्चे

खरसावां.खरसावां के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय का आदिवासी छात्रावास भवन जर्जर हो चुका है. करीब 22 साल पहले लाखों रुपये खर्च कर यहां 10 कमरों का छात्रावास बनाया गया था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे खंडहर में बदल रहा है. छात्रावास की छत से प्लास्टर गिर रहे हैं. लकड़ी के दरवाजे और खिड़कियां दीमक की चपेट में हैं और बारिश के दिनों में छत से पानी रिसता है. स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि भवन कभी भी गिर सकता है, जिसके कारण अब बच्चे इसमें नहीं रहते हैं. स्कूल के छात्र-छात्राओं ने स्कूल परिसर में नया आदिवासी छात्रावास भवन बनाने की मांग की है ताकि दूर-दराज के बच्चे यहां रहकर पढ़ाई कर सकें.

स्कूल के पांच कमरों में रहने को विवश हैं छात्र

आदिवासी छात्रावास भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए अब यहां कोई भी छात्र नहीं रहता है. करीब 27 बच्चे वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्कूल के अतिरिक्त क्लासरूम में रह रहे हैं. स्कूल प्रशासन ने बच्चों को रहने के लिए पांच क्लासरूम उपलब्ध कराए हैं, जहां वे बिस्तर लगाकर रहते और पढ़ाई करते हैं. यहां बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, खासकर शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें खुले मैदान या पुराने छात्रावास के शौचालय का उपयोग करना पड़ता है.

60 साल पुराना जनरल हॉस्टल भी बदहाली का शिकार

खरसावां के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में पहले एक जनरल हॉस्टल भी था, लेकिन रखरखाव के अभाव में इसका आधा हिस्सा गिर चुका है और बाकी कभी भी ध्वस्त हो सकता है. बताया जाता है कि 90 के दशक में इस हॉस्टल में बड़ी संख्या में छात्र रहकर पढ़ाई करते थे, लेकिन बाद में यह बंद हो गया.

प्रशासन से नये भवन निर्माण की मांग

प्राचार्य मंजू कुमारी हेंब्रम ने कहा कि राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय के आदिवासी हॉस्टल भवन की स्थिति बेहद जर्जर हो गयी है. हॉस्टल की दयनीय स्थिति को देखते हुए दूरदराज के बच्चों को स्कूल भवन के पांच अतिरिक्त कमरे उपलब्ध कराए गए हैं. साथ ही जिला प्रशासन को हॉस्टल की स्थिति से अवगत कराते हुए नए भवन के निर्माण की मांग की गयी है.

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