धान में बाली आते ही खेतों में पहुंचा 12 हाथियों का झुंड, किसानों की मेहनत पर मंडराया संकट

चांडिल के जानुम में 12 जंगली हाथियों के झुंड ने खेतों में जमकर उत्पात मचाया. जंगल से निकलकर हाथियों ने खेतों में तैयार फसल खायी और उसे रौंद दिया.

चांडिल: चांडिल वन क्षेत्र के जानुम गांव में शुक्रवार की सुबह करीब 12 जंगली हाथियों के झुंड ने खेतों में जमकर उत्पात मचाया. जंगल से निकलकर गांव के आसपास पहुंचे हाथियों ने धान के खेतों में घुसकर तैयार हो रही फसल खायी और उसे पैरों से रौंद दिया. धान में बाली भरने के समय फसल को हुए नुकसान से किसानों की चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों को डर है कि यदि हाथियों का झुंड इसी इलाके में बना रहा, तो आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर धान की फसल बर्बाद हो सकती है.

सुबह खेतों में पहुंचा हाथियों का झुंड, मची अफरा-तफरी

शुक्रवार की सुबह खेतों में हाथियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गयी. लोग अपने खेतों और घरों के आसपास सतर्क हो गये. ग्रामीणों के अनुसार, करीब 12 हाथियों का झुंड काफी देर तक खेतों में घूमता रहा. इस दौरान हाथियों ने धान की बालियां खायीं और पैरों से रौंदकर फसल को जमीन पर गिरा दिया.

हाथियों के खेतों में मौजूद रहने के कारण किसान अपनी फसल की रखवाली के लिए भी आगे नहीं बढ़ सके. ग्रामीणों को आशंका है कि हाथियों का झुंड दोबारा खेतों की ओर लौट सकता है. इससे आसपास के किसानों की परेशानी और बढ़ गयी है.

धान में आने लगी थी बालियां, महीनों की मेहनत पर संकट

खेत में विचरण करते हाथी

किसानों ने बताया कि धान की खेती में इस वर्ष काफी खर्च हुआ है. खेत की जुताई, बीज, खाद और मजदूरी समेत अन्य कृषि कार्यों में किसानों ने अपनी जमा पूंजी लगायी है. महीनों की मेहनत के बाद अब धान की फसल में बालियां आने लगी हैं और जल्द ही फसल पकने की उम्मीद है.

ऐसे समय में हाथियों के झुंड के खेतों में पहुंचने से किसानों के सामने फसल बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है. किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. इसके बावजूद वे उम्मीद के साथ फसल तैयार करते हैं. यदि हाथियों का झुंड लगातार खेतों में पहुंचता रहा, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

धान की फसल पर टिकी है ग्रामीण परिवारों की आमदनी

चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कई किसानों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती पर निर्भर है. ग्रामीणों के अनुसार, खेती से होने वाली आमदनी से ही परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं. सालभर के घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए किसान धान की फसल पर निर्भर रहते हैं.

फसल को अपना आहार बनाते हाथी

ऐसे में खेत में खड़ी फसल का नुकसान सीधे परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा. ग्रामीणों का कहना है कि जंगली हाथियों के कारण खेती पर खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन फसल के पकने के समय यह खतरा और गंभीर हो जाता है.

वन विभाग से हाथियों को हटाने और मुआवजे की मांग

ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे और झुंड को सुरक्षित तरीके से क्षेत्र से बाहर निकाले. समय रहते हाथियों को नहीं हटाया गया, तो खेतों में खड़ी बाकी फसल भी बर्बाद हो सकती है.

ग्रामीणों ने प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है. किसानों का कहना है कि उनकी महीनों की मेहनत हाथियों के झुंड से खतरे में है. अब वन विभाग की त्वरित पहल से ही बची हुई धान की फसल को सुरक्षित रखने की उम्मीद है.

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By Himanshu gope

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