81 बार रक्तदान और 84 बार प्लेटलेट्स दान कर डॉ. बिनय ने रचा सेवा का मिसाल, जानें उनकी कहानी

सरायकेला-खरसावां मॉडल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बिनय कुमार सिंह ने 81 बार रक्तदान और 84 बार प्लेटलेट्स दान कर समाज सेवा की मिसाल कायम की है. उनका यह कार्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है.

सरायकेला : शिक्षा के मंदिर में युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख देने वाले सरायकेला-खरसावां मॉडल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बिनय कुमार सिंह खुद भी समाज सेवा की मिसाल पेश कर रहे हैं. उन्होंने अब तक 81 बार रक्तदान और 84 बार प्लेटलेट्स दान (एसडीपी) कर मानवता की सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है. उनका यह योगदान न सिर्फ जिले, बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणादायी है.

कुछ सालों से नियमित रक्तदान करते आ रहे हैं

डॉ. सिंह पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से रक्त और प्लेटलेट्स दान करते आ रहे हैं. दुर्घटना, आपातकालीन स्थिति, थैलेसीमिया और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए उनका रक्तदान कई बार जीवन की उम्मीद बना है. खासकर प्लेटलेट्स की जरूरत वाले मरीजों के लिए उनका नियमित एसडीपी दान महत्वपूर्ण माना जाता है.

रक्तदान महादान है : डॉ सिंह

अपनी सेवा यात्रा के बारे में डॉ. सिंह कहते हैं कि रक्तदान महादान है. जब हम किसी अनजान व्यक्ति के लिए रक्त या प्लेटलेट्स देते हैं, तो सिर्फ रक्त की कुछ बूंदें नहीं देते, बल्कि उसके परिवार को उम्मीद और जिंदगी देते हैं. उन्होंने स्वस्थ लोगों से नियमित रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की. प्राचार्य की इस पहल का असर महाविद्यालय के विद्यार्थियों पर भी दिख रहा है. प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने उनकी सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा - उनका कार्य युवाओं को शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है.

युवाओं को रक्तदान के प्रति करते हैं जागरूक

डॉ. सिंह स्वयं रक्तदान करने तक सीमित नहीं हैं. वे युवाओं और स्थानीय लोगों को भी रक्तदान के प्रति जागरूक करते हैं. उन्होंने युवाओं से जन्मदिन और अन्य विशेष अवसरों पर रक्तदान करने का संकल्प लेने की अपील की, ताकि रक्त के अभाव में किसी जरूरतमंद की जिंदगी न थमे.

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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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