सरायकेला-खरसावां जिले में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं. तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और खराब सड़कें लोगों की जान ले रही हैं. इस साल पिछले 200 दिनों में जिले में 125 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 100 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें आधे से ज्यादा युवा शामिल हैं. यानी जिले में औसतन हर दो दिन में एक व्यक्ति सड़क हादसे में जान गंवा रहा है.
हर महीने औसतन 15 लोगों की मौत
जनवरी से जून तक जिले में 113 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई. वहीं 1 से 19 जुलाई के बीच 12 हादसों में 6 लोगों की जान चली गई. इस तरह हर महीने औसतन 15 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो रही है. वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 27 प्रतिशत बढ़ी थी और इस साल भी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है.
स्टंटबाजी और तेज रफ्तार बन रही हादसों की वजह
सड़क हादसों की एक बड़ी वजह युवाओं में स्टंटबाजी और रील बनाने का बढ़ता चलन भी है. शाम होते ही मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगी बाइक लेकर कई युवक सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते हैं. इससे अपनी और दूसरों की जान खतरे में पड़ जाती है.
वहीं पुलिस की जांच अक्सर हेलमेट और वाहन के कागजात तक सीमित रह जाती है. तेज रफ्तार भारी वाहन, ओवरलोडिंग और अन्य गंभीर उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भी हादसे बढ़ रहे हैं.
खराब और अच्छी दोनों सड़कें बन रही हैं हादसों की वजह
जिले की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं. सरायकेला-राजनगर, गिद्दीबेड़ा (कांड्रा)-चौका और खरसावां-रड़गांव सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं. कई स्थानों पर जलजमाव होने से वाहन चालक संतुलन खो देते हैं और हादसे हो जाते हैं. कांड्रा-सरायकेला-चाईबासा मार्ग पर भी सड़क की पिच उखड़ने से दुर्घटनाएं हो रही हैं. वहीं एनएच-33 पर चल रहे मरम्मत कार्य से भी खतरा बढ़ा है.
दूसरी ओर, चाईबासा-राजनगर-हाता जैसी अच्छी सड़कों पर वाहन चालक तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हैं, जिससे वहां भी लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं.
जिले में 20 ब्लैक स्पॉट चिह्नित
प्रशासन ने जिले में 20 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए हैं, जहां सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं. इनमें सरायकेला-आदित्यपुर मार्ग, चाईबासा मार्ग, कांड्रा-चौका मार्ग, हाता-राजनगर-चाईबासा मार्ग तथा चांडिल के एनएच-33 और एनएच-32 शामिल हैं. राहत की बात यह है कि खरसावां-कुचाई क्षेत्र फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है, जहां जागरूकता और नियमित वाहन जांच के कारण दुर्घटनाएं कम हुई हैं.
हादसों के मुख्य कारण
- जर्जर सड़कों के गड्ढे और स्लैग लदे वाहनों से उड़ने वाली धूल.
- बिना हेलमेट वाहन चलाना, ट्रिपल राइडिंग और शराब पीकर गाड़ी चलाना.
- नाबालिगों द्वारा ट्रैक्टर और भारी वाहन चलाना.
- ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार.
- अच्छी सड़क मिलते ही गति सीमा का पालन नहीं करना.
नौ वर्षों का रिकॉर्ड
| वर्ष | दुर्घटनाएं | मौत | घायल |
| 2018 | 182 | 121 | 87 |
| 2019 | 226 | 165 | 118 |
| 2020 | 171 | 124 | 88 |
| 2021 | 181 | 145 | 84 |
| 2022 | 215 | 161 | 118 |
| 2023 | 209 | 153 | 126 |
| 2024 | 198 | 173 | 90 |
| 2025 | 253 | 220 | 345 |
| 2026 | 120 | 100 | 75 (19 जुलाई तक) |
2026 में महीने के अनुसार स्थिति
| महीना | दुर्घटनाएं | मौत | घायल |
| जनवरी | 20 | 18 | 12 |
| फरवरी | 15 | 11 | 7 |
| मार्च | 22 | 20 | 12 |
| अप्रैल | 20 | 13 | 19 |
| मई | 13 | 10 | 4 |
| जून | 23 | 22 | 13 |
| जुलाई (19 जुलाई तक) | 12 | 6 | 8 |
उपायुक्त ने क्या कहा
उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने कहा कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग है. तेज रफ्तार के कारण वाहन पर नियंत्रण नहीं रहता और दुर्घटनाएं होती हैं. इसे रोकने के लिए जिला प्रशासन नियमित वाहन जांच अभियान चला रहा है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि चांडिल के एनएच-32, एनएच-33 और चाईबासा-राजनगर-हाता मार्ग जैसे ब्लैक स्पॉट पर स्पीड ब्रेकर, स्ट्रीट लाइट, रिफ्लेक्टिव साइनेज और सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. एनएच-33 के तीन प्रमुख ब्लैक स्पॉट को सुधारने का प्रस्ताव भी भेजा गया है. जिला सड़क सुरक्षा समिति लगातार फील्ड विजिट कर कमियों को दूर करने का काम कर रही है.
उपायुक्त ने लोगों से अपील की कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और कार चलाते समय सीट बेल्ट का जरूर इस्तेमाल करें. निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें. इससे न सिर्फ अपनी, बल्कि दूसरों की जान भी सुरक्षित रहेगी.
