खरसावां | हरे-भरे जंगलों के बीच 320 फीट ऊंची पहाड़ी... शिखर पर विराजमान मां आकर्षणी का दरबार... और शनिवार को चारों ओर गूंजते मां के जयकारे. प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक मां आकर्षणी पीठ में वार्षिक धुलिया जंताल पूजा श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई. आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु पैदल पहाड़ी की चढ़ाई कर मां के दरबार पहुंचे. पूजा के दौरान क्षेत्र में अच्छी बारिश, बेहतर फसल, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गयी.
राजा-रजवाड़े के जमाने से चली आ रही परंपरा
धुलिया जंताल पूजा मां आकर्षणी पीठ की वर्षों पुरानी परंपरा है. बुजुर्गों के अनुसार, राजशाही काल से ही यहां इस पूजा का आयोजन होता आ रहा है. उस समय पूजा का पूरा खर्च राजकोष से वहन किया जाता था. आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही. राज्य सरकार की ओर से पूजा के आयोजन में सहयोग दिया जाता है. इस वर्ष भी खरसावां अंचल कार्यालय की ओर से पूजा के लिए करीब 27 हजार रुपये की सहयोग राशि उपलब्ध करायी गयी.
दियुरी ने कराया पारंपरिक अनुष्ठान
वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार दियुरी नारायण सरदार, अगस्ती सरदार और जयसिंह सरदार ने विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न करायी. पूजा के दौरान क्षेत्र में अच्छी बारिश और अच्छी फसल के साथ लोगों के सुखी एवं समृद्ध जीवन की कामना की गयी. अनुष्ठान पूरा होने के बाद भंडारे का आयोजन किया गया. इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया.
जंगल और पहाड़ के बीच आस्था का अद्भुत नजारा
मां आकर्षणी पीठ धरातल से करीब 320 फीट ऊंची पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। पूजा के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कोई पैदल पहाड़ी चढ़कर मां के दरबार में पहुंचा तो कोई परिवार के साथ पूजा में शामिल हुआ। हरे-भरे जंगल और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित पीठ परिसर में दिनभर भक्तों की भीड़ बनी रही। पूरा परिसर मां के जयकारों से गूंजता रहा और माहौल भक्तिमय बना रहा।
पूजा में पहुंचे जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु
पूजा के दौरान खरसावां अंचलाधिकारी कप्तान सिंकू समेत चंद्र मोहन महतो, मानिक सिंहदेव, शंकरी सिंहदेव, गोवर्द्धन राउत, अनूप सिंहदेव, नंदु पांडेय, प्रदीप सिंहदेव, विप्लव पानी, सानो महतो, सिविल गोप, हुमुक सरदार, मोहन लाल सोय, मधु सरदार, लखन बांदिया, विजय राउत, किशोर कालिंदी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु मौजूद रहे.
