सरायकेला-खरसावां से शचींद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
World Blood Donor Day : विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर मॉडल महाविद्यालय, सरायकेला-खरसावां के प्राचार्य सह शतकवीर रक्तदाता डॉ बिनय कुमार सिंह ने समाज के नाम जारी अपने संदेश में नियमित रक्तदान को मानवता की सर्वोच्च सेवा बताते हुए लोगों से स्वैच्छिक रक्तदाता बनने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन प्रदान करने का माध्यम है.
डॉ. सिंह ने 81 बार रक्त और 79 बार प्लेटलेट दान किया
डॉ सिंह ने कहा कि अब तक वे 81 बार पूर्ण रक्तदान (होल ब्लड डोनेशन) और 79 बार प्लेटलेट दान (एफेरेसिस) कर चुके हैं. उनके अनुसार यह उपलब्धि किसी व्यक्तिगत गौरव का विषय नहीं, बल्कि उन अनेक परिवारों की आशा और मुस्कान से जुड़ी हुई है, जिनके साथ वे मानवता के इस अनमोल रिश्ते के माध्यम से जुड़े हैं.
पहले रक्तदान से शुरू हुआ सेवा का सफर
उन्होंने कहा कि पहली बार रक्तदान करते समय उनके मन में भी स्वाभाविक संकोच और डर था, लेकिन जब यह अनुभव हुआ कि उनके रक्त की कुछ बूंदों ने किसी मरीज को नया जीवन प्रदान किया है, तभी से सेवा का यह सफर शुरू हुआ और आज 160वें दान तक पहुंच चुका है. उनके अनुसार रक्तदान का प्रत्येक अवसर उन्हें आत्मिक संतोष और आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है.
रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर
डॉ सिंह ने कहा कि समाज में आज भी रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां और अनावश्यक भय व्याप्त हैं, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है. इससे न केवल जरूरतमंद मरीजों को जीवन मिलता है, बल्कि दाता का स्वास्थ्य भी सामान्य और संतुलित बना रहता है. उन्होंने विशेष रूप से प्लेटलेट दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि डेंगू, कैंसर और कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों के लिए इसकी आवश्यकता अचानक बढ़ जाती है. चूंकि प्लेटलेट्स को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, इसलिए नियमित दाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है.
रक्तदान को महादान बताते हुए किया आह्वान
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद मानव रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है, इसलिए रक्तदान वास्तव में महादान है. उन्होंने विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर सभी स्वस्थ नागरिकों से नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान करने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से रक्त के अभाव में होने वाली असमय मौतों को रोका जा सकता है और एक स्वस्थ, संवेदनशील और मानवीय समाज का निर्माण किया जा सकता है.
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