सरायकेला से शचींद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Kharsawan News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां में सोमवार को अक्षय तृतीया के मौके पर जगन्नाथ मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना किया गया. मंदिरों में प्रभु जगन्नाथ की पूजा अर्चना के बाद रथ निर्माण के लिए अनुमति ली गई. पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रथ निर्माण के लिए हवन-पूजन किया गया. परंपरा के अनुसार इस पूजा के बाद विधिवत रुप से रथ निर्माण का कार्य शुरु किया गया. इस मौके पर पुरोहित ने पहले रथ के चक्के पर पूजा की. इसके बाद कुल्हाड़ी से लकड़ी के टोना को काटकर रथ निर्माण कार्य की शुरुआत की.
अक्षय तृतीया से रथ निर्माण शुरु करने की परंपरा
अक्षय तृतीया को ही ओडिशा के पुरी के साथ अलग अलग जगन्नाथ मंदिरों में पूजा अर्चना कर रथ का निर्माण कार्य शुरु करने की परंपरा है. मान्यता है कि अक्षय तृतीय के साथ ही प्रभु जगन्नाथ के वार्षिक रथ यात्रा की तैयारी शुरु हो जाती है. सरायकेला में ओडिशा के कारीगरों द्वारा रथ का निर्माण किया जाएगा.
ढाई महीने में बन कर तैयार हो जाएगा प्रभु जगन्नाथ का रथ
सरायकेला, खरसावां और हरिभंजा के जगन्नाथ मंदिर में पूजा अर्चना कर रथ निर्माण के रस्म को निभाया गया. अगले ढाई महीने में प्रभु जगन्नाथ का भव्य रथ बन कर तैयार हो जाएगा. अक्षय तृतीया के ठीक 85 दिनों के बाद प्रभु जगन्नाथ रथ पर सवार हो कर अपने मौसी के घर श्री गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे. इसे श्रीगुंडिचा रथ यात्रा कहा जाता है.
प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई को
अक्षय तृतीया से ही प्रभु जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा की तैयारी शुरु हो जाती है. पूरे विधि विधान के साथ अक्षय तृतीया पर प्रभु जगन्नाथ के रथ निर्माण को ले कर पूजा की जाती है. प्रतीकात्मक तौर पर इसी दिन ही रथ का निर्माण कार्य शुरु होता है. इसे प्रभु जगन्नाथ के वार्षिक रथ यात्रा की तैयारी के रुप में देखा जाता है. मालूम हो कि इस साल रथ यात्रा का आयोजन 16 जुलाई को होगा. प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार हो कर श्रीगुंडिचा मंदिर जाएंगे. रथ यात्रा से दो दिन पहले प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का नेत्र उत्सव सह नव यौवन दर्शन होगा. इससे पहले 29 जून को प्रभु जगन्नाथ का वार्षिक स्नान यात्रा को आयोजित की जाएगी.
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