शचिंद्र कुमार दाश
Saraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई के सीमावर्ती रायसिंदरी गांव में गोपाल सिंह मुंडा की अध्यक्षता में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के तत्वावधान में पारंपरिक रूप से वनाधिकार पत्थलगड़ी का 15वां स्थापना दिवस मनाया गया. पत्थलगड़ी स्थल पर पाहन सागर मुंडा व पांडू मुंडा ने पूजा-अर्चना की. मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने जंगलों और जैव विविधताओं के संरक्षण का संकल्प लिया. कार्यक्रम में पहुंचे खूंटी के सांसद काली चरण मुंडा ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोगों का जल-जंगल से अगाढ़ संबंध है. जंगल बचेगा, तभी पर्यावरण संतुलन बना रहेगा और सभी प्राणी सुरक्षित रह सकेंगे.
उन्होंने कहा संगठित होकर जंगल के साथ-साथ जैव विविधताओं को बचाने की अपील की. उन्होंने भविष्य की पीढ़ियों के लिए जंगल संरक्षण को आवश्यक बताया. सांसद ने वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और दावों के समयबद्ध निपटान पर जोर दिया.
जंगल से जुड़ा है आदिवासियों का अस्तित्व : विधायक
खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि आदिवासियों का अस्तित्व जंगलों से जुड़ा है. हमें जंगलों के साथ जैव विविधताओं को भी हर हाल में संरक्षित करना होगा. उन्होंने वनोपज से जीविका के महत्व पर जोर दिया. कहा कि प्रकृति के जितना करीब रहेंगे, उतना ही सुखी रहेंगे. ग्रामीणों के किये जा रहे कार्यों से लगातार जंगलों का घनत्व बढ़ रहा है. इसे आगे भी जारी रखने है. जल-जंगल है, तभी कल है. विधायक दशरथ गागराई ने ग्रामीणों को रायसिंदरी के सभी 15 टोला में बुनियादी सुविधायें उपलब्ध कराने का भरोसा दिया. रायसिंदरी के क्षेत्र के समस्याओं को विधानसभा में उठाने की बात कही.
वन संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन पर बल : सोहनलाल
झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के केंद्रीय सदस्य सोहन लाल कुम्हार ने वनाधिकार कानून के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन पर बल दिया. उन्होंने कहा कि सामुदायिक प्रयासों से जंगलों का घनत्व बढ़ा है. उन्होंने गर्मी के दिनों में जंगलों में लगने वाली आग से भी जैव विविधताओं को बचाने की अपील की. सोहन लाल कुम्हार ने बताया कि वनाधिकार कानून 2006 के तहत वर्ष 2010 में रायसिंदरी के 145 वनाश्रितों को 762.71 एकड़ वन-भूमि पर व्यक्तिगत वनाधिकार प्रमाण – पत्र और 29 दिसंबर 2020 को 3406.45 एकड़ वन भूमि पर सामुदायिक वनाधिकार प्रमाण पत्र मिला है. 1964-65 के भू-सर्वे के अनुसार ये मौजा पूर्ण रूप में वन भूमि है, लेकिन आईसीएफजी संस्थान के सहयोग से कुचाई में रायसिंहदिरी एक आदर्श ग्राम का स्वरूप ले लिया है.
कार्यक्रम में मुख्य रूप से ये उपस्थित थे.
इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया. सभी अतिथियों को पारंपरिक पत्ते की टोपी पहनाकर स्वागत किया गया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से बासंती गागराई, सुखराम मुंडा, राज बागची, ग्रामीण मुंडा गोपाल सिंह मुंडा, दामु मुंडा, देवेंद्र सरदार, रविंद्र हाईबुरु, लाल सिंह सोय, कारु मुंडा, देवेंद्र सरदार, आरती मुंडा, विनती मुंडा, शारदा मनी मुंडा, धर्मेंद्र मुंडा, करम सिंह मुंडा, नायडू गोप, मुन्ना सोय, रुप सिंह गुंजा, राहुल सोय, बुधराम मुंडा समेत रायसिंदरी गांव के 15 टोला के सैकड़ों लोग पहुंचे थे.
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