शरद पूर्णिमा आज, खीर का प्रसाद बनाने की परंपरा

शरद पूर्णिमा को लक्ष्मी-नारायण की पूजा से घर में आती है समृद्धि खरसावां : गुरुवार को शरद पूर्णिमा मनायी जाएगी. शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है. यह काफी पावन दिन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा से समृद्धि आती है. पं एके आचार्य के अनुसार शरद पूर्णिमा […]

शरद पूर्णिमा को लक्ष्मी-नारायण की पूजा से घर में आती है समृद्धि

खरसावां : गुरुवार को शरद पूर्णिमा मनायी जाएगी. शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है. यह काफी पावन दिन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा से समृद्धि आती है. पं एके आचार्य के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से संपन्न होते हैं तथा उनकी किरणों से उस रात अमृत वर्षा होती है. मान्यता के अनुसार इस रात खीर बनाकर रात भर खुली चांदनी में रखने से उसमें चंद्र किरणों के माध्यम से अमृत और औषधीय गुणों का संचार हो जाता है. सुबह प्रसाद के रूप में उसका ही सेवन किया जाता है. यह कई बीमारियों की दवा भी माना जाता है.
शरद पूर्णिमा का महत्व : शास्त्रों के अनुसार इस दिन अगर अनुष्ठान किया जाए तो यह अवश्य सफल होता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था. इस व्रत को विशेष रूप से लक्ष्मी-प्राप्ति के लिए किया जाता है. इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है. रात को चन्द्रमा को अर्घ देने के बाद ही भोजन करने की परंपरा है.
ओड़िया समुदाय का कार्तिक व्रत आज से : ओड़िया समुदाय का पवित्र कार्तिक व्रत गुरुवार से शुरू होगा, जो पूरे महीने चलेगा. ओड़िया संस्कृति में कार्तिक सबसे पवित्र महीना माना जाता है तथा इस पूरे महीने लोग व्रत रखते हैं. महीने के अंतिम पांच दिन पंचक का आयोजन होता है. कार्तिक माह के दौरान महिलाएं सुबह जलाशयों में स्नान कर भगवान राय दामोदर की पूजा करती हैं.
तुलसी मंडप के पास रंग-बिरंगी रंगोली बना कर राय-दामोदर की आराधना की जाती है. एक माह तक तुलसी मंडप के पास दीपदान किया जाता है. इसे आकाश दीप करते हैं.

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