खरसावां में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां बासंती दुर्गा पूजा शुरू, 1903 से हो रही आराधना

Kharsawan Basanti Durga Puja: खरसावां में 1903 से चली आ रही मां बासंती दुर्गा पूजा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरू हुई. सप्तमी पर हवन, आरती और पुष्पांजलि हुई. सरायकेला, टेंटोपोसी, चांडिल और खूंटी में भी पूजा का आयोजन हो रहा है. श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और भक्ति का माहौल देखा जा रहा है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Kharsawan Basanti Durga Puja: सर्व मंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्रयंबिके गौरी, नारायणी नमस्तुते, शरणागत दीनार्त, परित्रणय परायणो, सर्व स्यार्ति हरे देवी नारायणी नमोस्तुते…जैसे वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ झारखंड के खरसावां में बासंती दुर्गा पूजा शुरू हुई. मंगलवार को चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां बासंती की सप्तमी पूजा की. इस दौरान हवन पूजन किया गया. साथ ही, मां बासंती दुर्गा की आरती उतारने के साथ साथ भक्तों ने पुष्पांजलि अर्पित की गई.

बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

सप्तमी पर मां बासंती दुर्गा की पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. भक्त सब कुछ भुला कर माता की आराधना में जुटे हुए है. पूजा के दौरान सप्तशती चंडी पाठ भी किया गया. बताया गया कि 25 मार्च को अष्टमी, 26 मार्च को नवमी पूजी की जाएगी. 27 मार्च को विजय दशमी की पूजा होगी. बासंती दुर्गा पूजा के दौरान अगले तीन दिनों तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे. बासंती पूजा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है. इसी दिन मंदिर परिसर में ब्रम्ह कुमारों का विधि-पूर्वक उपनयन संस्कार आयोजित की जाएगी

खरसावां में 1903 से हो रही है मां बासंती की पूजा

खरसावां में वर्ष 1903 से हर वर्ष ब्राह्मण समाज की ओर से बासंती दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है. खरसावां के बासंती मंदिर में मां भगवती की पूजा के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं. मां बासंती का भव्य मंदिर बनाया गया है. मां बासंती मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया गया है. इस दौरान से पूजा कमेटी के अध्यक्ष हरिश्चंद्र आचार्य, सचिव कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी, सुकदेव पति, पंकज मिश्रा, बिरोजा पति, पं प्रदीप दाश, तारापद सतपति, रंजीत मिश्रा, अशित मिश्रा, राजेश मिश्रा, सुजीत हाजरा, सुशील षाड़ंगी, जगन्नाथ पति आदि उपस्थित थे.

जिले के दूसरे क्षेत्रों में भी पूजा

सरायकेला-खरसावां जिले के दूसरे क्षेत्रों में भी मां बासंती की पूजा की जा रही है. सरायकेला के टेंटोपोसी में भी मंगलवार से मां बासंती की पूजा पूरे भक्ति भाव के साथ शुरू हुई. यहां नवनिर्मित मंदिर में मां बासंती की भव्य प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जा रही है. मंगलवार को सप्तमी पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच कर पुष्पांजलि अर्पित की. इस दौरान भंडारे का आयोजन कर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया. टेंटोपोशी गांव में वर्ष 1984 से मां बासंती दुर्गा की पूजा पूरे उत्साह के साथ की जाती है. टेंटोपोशी के बासंती दुर्गा पूजा में विभिन्न क्षेत्रों से लोग पहुंचते हैं.

चांडिल और खूंटी में भी मां बासंती दुर्गा पूजा

चैत्र नवरात्र पर चांडिल और खूंटी में भी मां बासंती दुर्गा पूजा की जा रही है. सार्वजनिक श्रीश्री नवदुर्गा पूजा समिति चौका की ओर से चैत्र नवरात्रि पर मां बांसती की पूजा-अर्चना कलश स्थापित कर शुरू कर दी गई. खूंटी में मां बासंती मंदिर में देवी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है. हेंसाकोचा पंचायत के कोकेबेड़ा के अलावा ईचागढ़ प्रखंड के ईचागढ, सोड़ो, नीमडीह प्रखंड के जांता और आदरडीह समेत कई स्थानों में मां बासंती की पूजा-अर्चना की जा रही है.

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कुचाई के दुर्गा मंदिर में मां कालरात्रि की पूजा

खरसावां के कुचाई के दुर्गा मंदिर में मंगलवार को चैती नवरात्र के सातवें दिन सप्तमी को मां भगवती के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की गई. तीर्थराज काशी से आए पुजारी विकास तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां भगवती के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की. इस दौरान हवन-पूजन किया गया. इस दौरान मुख्य रूप से इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. दूसरी ओर घरों में भी कलश स्थापना कर मां भगवती की पूजा की जा रही है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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