विश्व यक्ष्मा दिवस पर विशेष : सरायकेला-खरसावां जिले के 28 पंचायत हुए टीबी मुक्त

Saraikela: सरायकेला खरसावां जिले के 28 पंचायत टीबी मुक्त हो चुके हैं. 2024 में यह संख्या 8 थी. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ चंद्रभूषण चौधरी ने बताया कि इस साल घर-घर जाकर लोगों की जांच की जाएगी. पिछले साल भी लक्ष्य से अधिक बलगम की जांच की गई है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

शचिंद्र कुमार दाश/धीरज कुमार
Saraikela: टीबी मुक्त भारत को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चलाये जा रहे कार्यक्रमों का असर सरायकेला-खरसावां जिला में भी दिखाई देने लगा है. अब तक जिले के 28 पंचायत को टीबी मुक्त किया जा चुका है. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ चंद्रभूषण चौधरी ने बताया कि जिला को टीबी मुक्त बनाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम निरंतर प्रयासरत है. इसके लिए जितने भी आवश्यक कार्यक्रम हैं वे सभी समयानुसार चलाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में जिले के आठ पंचायत को टीबी मुक्त किया गया था. इस वर्ष जिले के 28 पंचायत को टीबी मुक्त कर लिया गया है.

सरायकेला-खरसावां जिले में लक्ष्य से अधिक बलगम की जांच

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि जिले को टीबी मुक्त बनाने के अभियान को निरंतर चलाया जा रहा है. इसके तहत बलगम की जांच की जा रही है. अभियान की सफलता को लेकर लक्ष्य से अधिक बलगम की जांच की गई है. वर्ष 2024 में 20556 बलगम जांच का लक्ष्य था, जहां 30671 लोगों की बलगम जांच की गई. वहीं वर्ष 2025 में 20728 के लक्ष्य के बावजूद 35885 बलगम को जांच की गई. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में 1971 टीबी से संक्रमित मरीज पाए गए, वहीं वर्ष 2025 में 2432 संक्रमित मरीज पाए गए. डॉ चौधरी ने बताया कि जिले में कुछ हिडेन (छुपे हुए) केस भी हैं, जिनकी जांच की जा रही है.

निक्षय मित्रों ने 1365 टीबी मरीजों को लिया है गोद

सरायकेला-खरसावां जिले में वर्तमान में 1471 ऑन ट्रीटमेंट टीबी मरीज हैं. इनमें से 1365 टीबी मरीजों को निक्षय मित्रों द्वारा गोद ले लिया गया है. ये मरीजों को हर माह फूड बास्केट के जरिए पोषण उपलब्ध कराते हैं. फूड बास्केट में प्रोटीन डायट (चना, दाल, गुड़, मूंगफली, तेल इत्यादि) दिया जाता है. कोई भी व्यक्ति या संस्थान निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद ले सकता है. निक्षय मित्र टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पौष्टिक भोजन (पोषण) मुहैया कराने में मदद करते हैं. कॉरपोरेट घराने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को राशि उपलब्ध करायी जाती है.

24 मार्च से जिला में 100 डेज प्रोग्राम शुरू किया जाएगा

सरायरकेला में टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) को हराने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ चंद्रभूषण चौधरी ने बताया कि 24 मार्च से जिला में 100 डेज प्रोग्राम शुरू किया जाएगा. इसके तहत स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगे. उन्होंने बताया कि जिला में हैंड हेल्ड एक्स रे मशीन उपलब्ध है. 100 डेज प्रोग्राम के दौरान स्वास्थकर्मी अपने साथ इस एक्स रे मशीन को लेकर दौरा करेंगे. जो मरीज स्वास्थ्य केंद्र तक आने में असमर्थ हैं उन्हें उनके घर में ही इस मशीन के सहारे एक्स रे कर उनकी जांच करेंगे.

निक्षय पोषण योजना से आर्थिक मदद

सरकार की ओर से चलायी जा रही निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को आर्थिक मदद की जाती है, ताकि वे पौष्टिक भोजन ले सकें. उनके खाते में 1000 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं. पहले यह सहायता राशि 500 रुपए थी, लेकिन बीते अक्टूबर नवंबर माह से सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर 1000 कर दिया है.

2 सप्ताह से अधिक खांसी टीबी हो सकती है

डॉ चौधरी ने बताया कि टीबी बीमारी से ग्रसित होने वाले इंसान के अनादर कुछ विशेष लक्षण पाए जाते हैं. इसके तहत 2 सप्ताह से अधिक खांसी का होना, शाम को बुखार आना, छाती में दर्द महसूस होन, भूख न लगाना, वजन कम होना एवं खांसते समय बलगम में खून का आना जैसे लक्षण शामिल हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि, अपने किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चिकित्सकों से परामर्श जरूर लेना चाहिए.

देश को टीबी मुक्त करने की समयावधि बढ़ी

भारत सरकार की ओर से 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन वर्ष 2020 और 2021 कोरोना काल होने के कारण लक्ष्य प्राप्ति संभव नहीं हो सका. अब इस लक्ष्य प्राप्ति की समयावधि को बढ़ाकर 2027 किया गया है. सरायकेला-खरसावां को भी टीबी मुक्त करने का प्रयास जारी है.

सरायकेला-खरसावां जिले में टीबी मुक्त घोषित हुए पंचायत

टीबी मुक्त हुए पंचायतों को सिल्वर और ब्रोंच ग्रुप में बांटा गया है. इसमें 3 पंचायत सिल्वर ग्रुप में शामिल है, इनमें नीमडीह प्रखंड का आदरडीह एवं झीमड़ी पंचायत और गम्हरिया प्रखंड का जयकान पंचायत को सिल्वर ग्रुप में रखा गया है. वहीं बाकी के 25 पंचायतों को ब्रोंच ग्रुप में रखा गया है.
टीबी मुक्त पंचायत
राजनगर प्रखंड : डुमरडीहा, धुरीपदा और बड़ा सुजुलता.
सरायकेला प्रखंड : कमलपुर और उपरदुगनी.
गम्हरिया प्रखंड : नारायणपुर, चमारू, नुआगढ़, दुग्धा और जयकान.
चांडिल प्रखंड : आसनबानी और हेंसाकोचा.
नीमडीह प्रखंड : आदरडीह, बड़ेदा, बीरासी सिरूम, हेवन, झीमड़ी, लाकरी, ओड़िया, परगामा और लुपुंगडीह
ईचागढ़ प्रखंड : ईचाडीह,लैपाटांड, लेटेमदा, सीतू, तिरुलडीह वन एवं तूता.

28 पंचायत के मुखिया को उपायुक्त करेंगे सम्मानित

सरायकेला-खरसावां जिले के टीबी मुक्त होने वाले 28 पंचायत के मुखिया को उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह के द्वारा विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा. इसके तहत उक्त सभी मुखिया को जिला समाहरणालय परिसर में उपायुक्त के द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं गांधी जी का मोमेंटो देकर सम्मानित किया जाएगा.

मरीजों को गोद लेने वाले निक्षय मित्र

सरायकेला-खरसावां जिले के टीबी मरीजों को गोद लेने वाले निक्षय मित्रों में मेटाल्सा कंपनी ने 108, आरएसबी ट्रांसमिशन ने 146, रुंगटा माइंस ने 150, अमलगम स्टील ने 100, यमुना ऑटो लिमिटेड ने 140, आधुनिक पावर प्लांट ने 500, एसएम स्टील ने 89 और झारखंड ग्रांट केयर ने 132 टीबी मरीजों को गोद लिया है.

ये भी पढ़ें…

Gumla: ईंट भट्ठा व्यवसायी से 5 लाख लेवी वसूलने पहुंचा अपराधी, पुलिस ने धर दबोचा

Gumla: छिन गई घर की मुस्कान, 14 साल के युवक की नदी में डूबने से मौत

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >