कोल्हान के सबसे बड़े प्रखंड राजनगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल
30 बेड के अस्पताल में सिर्फ प्राथमिक उपचार की सुविधा, दवा और चिकित्सक का अभाव
आठ चिकित्सक की जगह मात्र पांच पदस्थापित
तीन वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड किया गया, सुविधा नहीं बढ़ी
सरायकेला/राजनगर : कोल्हान के सबसे बड़े प्रखंड राजनगर (सरायकेला-खरसावां) में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल है. 1.36 लाख की आबादी पांच चिकित्सक के भरोसे है. अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवा भी नहीं है. अधिकारी आवंटन नहीं मिलने की रोना रो रहे हैं. अस्पताल में सिर्फ ब्लड टेस्ट होता है. अन्य सुविधाओं के लिए दूर सरायकेला अस्पताल या एमजीएम अस्पताल आना पड़ता है.
राजनगर सीएचसी 30 बेड वाला अस्पताल है, लेकिन व्यवस्था उपस्वास्थ्य केंद्र जैसी है.
यहां सिर्फ प्राथमिक उपचार की सुविधा है.
एक्सरे, इसीजी व अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं : राजनगर सीएचसी में एक्स रे, इसीजी, अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है. यहां उपकरण व टेक्नीशियन नहीं हैं. ऐसे मरीजों को सदर अस्पताल सरायकेला या एमजीएम (जमशेदपुर) रेफर कर दिया जाता है. अस्पताल में एमडी मेडिसिन व सर्जन नहीं है. इसके कारण किसी प्रकार का ऑपरेशन नहीं होता है.
एक वर्ष में आठ लाख की दवा का खर्च, मिला 1.85 लाख
राजनगर सीएचसी में दवा के संबंध में बताया गया कि वर्ष भर में लगभग आठ लाख की दवा का खर्च होता है. इनमें मात्र 1.85 लाख राशि मिला है. बाकी राशि का आवंटन मांगा गया है. सुविधा के अभाव में अधिकांश बेड खाली पड़े हैं. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अर्जुन सोरेन ने बताया कि बेहतर इलाज के लिए एमजीएम या सदर अस्पताल रेफर कर देते हैं.
डॉक्टर (स्वीकृत पद) : आठ
डॉक्टर (पदस्थापित) : पांच
लिपिक एक, कंप्यूटर ऑपरेटर दो, महिला निरीक्षक एक, नर्स 10, स्वीपर पांच ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर का एक पद खाली.
इसीजी व अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक का पद खाली
