कुचाई सीएचसी में आठ की जगह चार ही चिकित्सक
सीएचसी में एक भी महिला चिकित्सक नहीं
कुचाई : कुचाई प्रखंड की बड़ी आबादी को आज भी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. नियमानुसार हर पंचायत में दो ममता वाहन होने चाहियें, ताकि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके, परंतु कुचाई की दस में से सात पंचायतों में ममता वाहन हैं ही नहीं. सिर्फ मरांगहातु, रुचाव व अरुवां पंचायतों में एक-एक ममता वाहन हैं.
बाकी सात पंचायतों की गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल होता है. कुचाई के कई क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां वाहन नहीं पहुंच सकते. कुचाई सीएचसी क्षेत्र में नवजात बच्चों की मौत रोकना चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रखंड में बच्चों की मृत्य दर बहुत अधिक है. वर्ष 2016-17 में 26 बच्चों व आठ माताओं की, जबकि 2017-18 में जुलाई तक छह बच्चों व तीन माताओं की मौत हो चुकी है.
कुचाई के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार या हीमोग्लोबिन की कमी, हड़िया सेवन, गर्भावस्था में अधिक मेहनत तथा सही समय पर संस्थागत प्रसव नहीं होने से यह संख्या बढ़ जाती है. कुचाई सीएसची में प्रतिमाह औसतन 60 संस्थागत प्रसव होते हैं.
चिकित्सकों के आधे पद रिक्त : कुचाई सीएचसी में चिकित्सकों के आठ स्वीकृत पद हैं, लेकिन यहां मात्र चार चिकित्सक पदस्थापित हैं उनमें एक भी महिला चिकित्सक नहीं. इनपर ही 80 हजार लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेवारी है. प्रखंड के 14 उप स्वास्थ्य केंद्रों में से जेनालोंग, जोंबरो, सुरसी व सियाडीह उपकेंद्र भवन विहीन हैं तथा ये नर्सों के भरोसे ही चलते हैं. विशेष कैंप लगने पर ही चिकित्सक वहां पहुंचते हैं. यहां स्वीकृत 34 की जगह 29 एएनएम ही पदस्थापित हैं.
