राजमहल.
लोक आस्था, निष्ठा और अनुशासन के चार दिवसीय महापर्व चैती छठ का समापन बुधवार की सुबह उदीयमान भगवान भास्कर को अंतिम अर्घ्य अर्पित करने के साथ संपन्न हो गया. राजमहल के सूर्य देव घाट एवं काली घाट सहित विभिन्न छठ घाटों पर हजारों की संख्या में छठव्रती और श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा उषा अर्घ्य अर्पित किया. अहले सुबह से ही व्रती गंगा जल में खड़े होकर भगवान सूर्य के उदय होने की प्रतीक्षा करते रहे. जैसे ही पूर्व दिशा के क्षितिज पर भगवान भास्कर की लालिमा दिखायी दी, व्रतियों ने नेम-निष्ठा के साथ अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि, संतान के मंगल तथा समाज की खुशहाली की कामना की. घाटों पर भक्ति का अनोखा वातावरण देखने को मिला. महिलाएं ‘हे छठी मईया हर लीं बलैया हमार’ और ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए छठी मईया के जयकारे लगाती नजर आयीं. उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने पारण कर व्रत का समापन किया. छठ पर्व को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. थाना प्रभारी हसनैन अंसारी के नेतृत्व में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा. उनके निर्देशन में महापर्व शांतिपूर्ण, अनुशासित और श्रद्धापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ.
