प्रतिनिधि, बोरियो. प्रखंड क्षेत्र के खुटा पहाड़ रोड स्थित गुबोरियोनी चुनी तसर सेंटर में तसर रेशमकीट पालन में कीट एवं रोगों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर वैज्ञानिक-कृषक अंतःक्रिया कार्यक्रम आयोजित किया गया. केंद्रीय रेशम बोर्ड के ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में तसर उत्पादन के दौरान कीट एवं रोगों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक एवं एकीकृत उपायों की जानकारी किसानों को दी गयी.
समय पर रोग की पहचान और रोकथाम पर जोर
कार्यक्रम के दौरान तसर कृषकों को तसर रेशमकीट को प्रभावित करने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान, उनके लक्षण और समय पर रोकथाम के उपायों के बारे में बताया गया. वैज्ञानिकों ने कहा कि शुरुआती स्तर पर कीट एवं रोगों की पहचान कर उचित प्रबंधन तकनीक अपनाने से फसल क्षति को कम किया जा सकता है.
किसानों को पालन स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने, निवारक उपायों को अपनाने और अनुशंसित प्रबंधन तकनीकों का उचित समय पर इस्तेमाल करने की व्यावहारिक जानकारी दी गयी.
बेहतर गुणवत्ता के तसर कोकून उत्पादन की जानकारी
वैज्ञानिक-कृषक अंतःक्रिया के दौरान तसर रेशमकीटों की जीवितता बढ़ाने और बेहतर गुणवत्ता वाले तसर कोकून के उत्पादन पर भी चर्चा की गयी. किसानों को बताया गया कि कीट एवं रोगों का प्रभावी प्रबंधन करने से न केवल उत्पादन में होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है, बल्कि कोकून की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है.
किसानों ने साझा किये क्षेत्रीय अनुभव
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपने क्षेत्र में कीट एवं रोगों से जुड़ी मौसमी समस्याओं, अनुभवों और व्यावहारिक चुनौतियों को वैज्ञानिकों के समक्ष रखा. वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को समझते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया.
वैज्ञानिकों ने किसानों से तसर पालन के दौरान नियमित निगरानी रखने और किसी भी तरह के रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उचित उपाय अपनाने की अपील की.
मौके पर केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. प्रमित पंडित, पायलट प्रोजेक्ट ऑफिसर रवि शंकर शर्मा सहित बड़ी संख्या में तसर कृषक मौजूद थे.
