प्रतिनिधि, साहिबगंज: जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को लेकर जिला प्रशासन द्वारा दो दिनों की छुट्टी का आदेश जारी किया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई शिक्षक और अभिभावक असमंजस में हैं.
सबसे ज्यादा परेशानी उन शिक्षकों की है, जिनका घर या मोहल्ला बाढ़ प्रभावित है, लेकिन उनका विद्यालय किसी सुरक्षित इलाके में स्थित है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उन्हें विद्यालय जाना है या प्रशासन के आदेश के तहत छुट्टी का लाभ मिलेगा.
घर से निकलना मुश्किल, स्कूल जाना भी जरूरी?
बाढ़ प्रभावित इलाके में रहने वाले शिक्षकों के सामने दोहरी परेशानी है. यदि वे बाढ़ के कारण विद्यालय नहीं जाते हैं, तो उन्हें अपनी उपस्थिति को लेकर चिंता है. वहीं, यदि विद्यालय जाने के लिए घर से निकलते हैं, तो बाढ़ प्रभावित रास्तों से गुजरना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है.
शिक्षकों का कहना है कि प्रशासन के आदेश में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों के लिए छुट्टी की बात कही गयी है, लेकिन निवास स्थान और विद्यालय के अलग-अलग क्षेत्र में होने की स्थिति को लेकर स्पष्टता नहीं है.
छात्रों को स्कूल भेजने से भी अभिभावक परेशान
इसी तरह कई छात्र-छात्राओं के घर बाढ़ प्रभावित इलाके में हैं, जबकि उनके विद्यालय दूसरे और सुरक्षित क्षेत्र में स्थित हैं.
अभिभावकों का कहना है कि जब घर के आसपास बाढ़ का पानी जमा है, तो बच्चों को विद्यालय भेजना सुरक्षित नहीं माना जा सकता. बच्चों को स्कूल भेजने के लिए उन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकालना पड़ेगा, जिससे हादसे का खतरा बना रह सकता है.
शिक्षकों की मांग- स्पष्ट आदेश जारी करे प्रशासन
बाढ़ प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि जिला प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए.
शिक्षकों के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या शिक्षक के निवास स्थान के बाढ़ प्रभावित होने पर भी छुट्टी का लाभ मिलेगा, या केवल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्थित विद्यालय के शिक्षकों को ही छुट्टी दी जायेगी?
स्पष्ट आदेश नहीं होने के कारण शिक्षक अपनी स्थिति को लेकर असमंजस में हैं.
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सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए शिक्षक, छात्र और अभिभावक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन को ऐसी स्थिति में स्पष्ट और व्यावहारिक निर्देश जारी करना चाहिए, ताकि किसी को भ्रम की स्थिति में जोखिम उठाकर विद्यालय जाने के लिए मजबूर न होना पड़े.
प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट होने पर बाढ़ प्रभावित शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों की परेशानी काफी हद तक दूर हो सकती है.
