बरहरवा. क्षेत्र के किसानों को खेती के लिए उपयोग होने वाले DAP और यूरिया सरकारी दर से अधिक मूल्य पर खरीदने की शिकायत सामने आयी है. बरहरवा, कोटालपोखर और गुमानी के स्थानीय बाजारों में किसानों से इन उर्वरकों की अधिक कीमत वसूले जाने का आरोप है. मामले को लेकर पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र की विधायक निसात आलम ने झारखंड सरकार के कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की से मुलाकात कर शिकायत की है.
सरकारी दर से DAP 500 रुपये और यूरिया 83.50 रुपये महंगा
विधायक ने बताया कि सरकारी दर के अनुसार DAP की कीमत 1350 रुपये प्रति बोरा और यूरिया की कीमत 266 रुपये 50 पैसे प्रति बोरा निर्धारित है. इसके बावजूद स्थानीय बाजार में DAP 1850 रुपये और यूरिया 350 रुपये प्रति बोरा की दर से बेचे जाने की शिकायत मिल रही है. स्थानीय बाजार में बतायी जा रही कीमत के अनुसार किसानों को DAP के लिए सरकारी दर से 500 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं. वहीं यूरिया की कीमत भी निर्धारित सरकारी दर से 83 रुपये 50 पैसे अधिक बतायी गयी है. इससे खेती पर होने वाला किसानों का खर्च बढ़ रहा है और उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
किसानों की शिकायत पर विधायक ने अधिकारियों से की बात
विधायक निसात आलम ने बताया कि किसानों की ओर से शिकायत मिलने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने विभाग के अधिकारियों से भी इस संबंध में वार्ता की. इसके बाद कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी.
कृषि मंत्री ने तत्काल समाधान का दिया आश्वासन
विधायक के अनुसार कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से इस समस्या का तत्काल समाधान कराने का आश्वासन दिया है. किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने और शिकायत पर कार्रवाई की दिशा में विभागीय स्तर पर कदम उठाये जाने की उम्मीद है.
उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाने की मांग
विधायक निसात आलम ने पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने की मांग की है. उनका कहना है कि मामले की गहराई से जांच होने पर उर्वरक की अधिक कीमत वसूले जाने के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सकेगी. विधायक ने कथित सिंडिकेट में शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई की मांग भी की है.
महंगे खाद से किसानों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
खेती के लिए DAP और यूरिया महत्वपूर्ण उर्वरक हैं. ऐसे में सरकारी दर से अधिक कीमत पर खाद खरीदने की स्थिति किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही है. स्थानीय बाजारों में अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायत की जांच और निर्धारित दर पर खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.
