साहिबगंज : राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय निदेशालय, पटना, बिहार एवं झारखंड के तत्वावधान में मंगलवार को एएन कॉलेज पटना में दो दिवसीय राज्य स्तरीय एनएसएस सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया. सम्मेलन में सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका ने विश्वविद्यालय की एनएसएस समन्वयक डॉ. पूनम बिंझा के नेतृत्व में सक्रिय एवं प्रभावी सहभागिता दर्ज की. सम्मेलन में विश्वविद्यालय के विभिन्न अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के 12 कार्यक्रम पदाधिकारी एवं जिला नोडल पदाधिकारी उपस्थित रहे.
एनएसएस गतिविधियों को समाज की जरूरतों से जोड़ने पर जोर
क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का मंगलवार को समापन समारोह हुआ. सम्मेलन में पूर्व निदेशक दीपक कुमार भी शामिल हुए. सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों को पारंपरिक आयोजनों से आगे ले जाकर समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना, युवाओं की भागीदारी को सुदृढ़ करना तथा सामुदायिक सेवा कार्यों को अधिक परिणामोन्मुखी एवं टिकाऊ बनाना था.
अभिनव सामुदायिक विकास मॉडल की रूपरेखा प्रस्तुत
सम्मेलन के तकनीकी सत्र में विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से अभिनव सामुदायिक विकास मॉडल की रूपरेखा प्रस्तुत की गई. इसके तहत चार मुख्य चरणों को रेखांकित किया गया. इसमें स्थानीय समुदाय की वास्तविक आवश्यकताओं, समस्याओं और चुनौतियों का व्यवस्थित अध्ययन, विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय नागरिकों की सहभागिता, शिक्षा, कौशल संवर्धन, परामर्श एवं नए अवसरों के माध्यम से सशक्तिकरण तथा दीर्घकालिक समाधान विकसित करने पर जोर दिया गया.
इस मॉडल का मुख्य ध्येय एनएसएस के कार्यक्षेत्र को एकदिवसीय एवं अल्पकालिक गतिविधियों से आगे बढ़ाकर निरंतर एवं संस्थागत सामुदायिक जुड़ाव की ओर अग्रसर करना है.
डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने रखे कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव
साहिबगंज कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने एनएसएस की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे. उन्होंने प्रत्येक एनएसएस इकाई द्वारा गांवों को दीर्घकालिक विकास के लिए गोद लेने तथा वहां की आवश्यकताओं का नियमित मूल्यांकन करने का सुझाव दिया.
उन्होंने संडे फॉर सोसाइटी के रूप में प्रत्येक रविवार को सामाजिक गतिविधियों के लिए संचालित करने तथा एक स्वयंसेवक एक सामाजिक जिम्मेदारी की अवधारणा लागू करने का सुझाव दिया. ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर साक्षरता अभियान, करियर काउंसलिंग, कौशल विकास एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया गया.
पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल साक्षरता पर भी चर्चा
पर्यावरण पाठशाला, जल प्रहरी एवं ग्रीन वॉलंटियर जैसी पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया गया. पेड़ लगाएं, जल बचाएं, प्लास्टिक हटाएं और स्वच्छता अपनाएं को जागरूकता अभियान का मुख्य आधार बनाने की अनुशंसा की गई. केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि रोपित पौधों के दीर्घकालिक संरक्षण एवं देख-रेख का उत्तरदायित्व स्वयंसेवकों को सौंपने का सुझाव दिया गया.
ग्रामीण एवं शहरी समुदायों के बीच आउटरीच कार्यक्रमों को मजबूत करने, डिजिटल एवं साइबर साक्षरता शिविर आयोजित करने तथा स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए युवा संवाद के आयोजन पर भी बल दिया गया.
एनएसएस प्रभाव रजिस्टर बनाने का प्रस्ताव
सामाजिक प्रभाव को पारदर्शी ढंग से दर्ज करने के लिए प्रत्येक इकाई में एनएसएस प्रभाव रजिस्टर बनाए जाने की आवश्यकता जताई गई. समुदाय पर पड़े प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए मापने योग्य मानक विकसित करने की बात कही गई. उत्कृष्ट कार्यों एवं सर्वोत्तम अभ्यासों के प्रलेखन के लिए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर पत्रिका अथवा जर्नल के प्रकाशन तथा स्थानीय निकायों एवं सरकारी एजेंसियों के साथ संस्थागत सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया.
एसकेएमयू के विभिन्न संस्थानों की रही सहभागिता
राज्य स्तरीय सम्मेलन में एसकेएमयू के अंतर्गत आने वाले रमा देवी बाजला महिला महाविद्यालय, एम.जी. कॉलेज रानीश्वर, साहिबगंज कॉलेज, गोड्डा कॉलेज, जे.जे.एस. डिग्री कॉलेज मिहिजाम, डिग्री कॉलेज नाला-फतेहपुर एवं मॉडल कॉलेज सुग्गाबथान के कार्यक्रम पदाधिकारियों ने उपस्थिति दर्ज कराई तथा विचार-विमर्श में भाग लिया.
सम्मेलन का समापन सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने तथा भविष्य में एनएसएस की गतिविधियों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाने के संकल्प के साथ हुआ.
