गुड्डू रजक, मंडरो/साहिबगंज: मिर्जाचौकी रेलवे स्टेशन परिसर में इस वर्ष वर्षों पुरानी विश्वकर्मा पूजा की परंपरा टूट गयी. स्टेशन परिसर में बाबा विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित नहीं की गयी और न ही पूजा को लेकर मेले का आयोजन हुआ. इससे स्थानीय श्रद्धालुओं और आसपास के ग्रामीणों में मायूसी देखी गयी.
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे प्रशासन की ओर से स्टेशन परिसर में पंडाल बनाने से रोक दिया गया और पूजा के लिए अनुमति दिखाने की मांग की गयी. इसके बाद इस वर्ष स्टेशन परिसर में विश्वकर्मा पूजा का आयोजन नहीं हो सका.
स्टेशन बनने के बाद से होती रही थी पूजा
स्थानीय लोगों के अनुसार, मिर्जाचौकी रेलवे स्टेशन के निर्माण के बाद से ही स्टेशन परिसर में बाबा विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती रही है. रेलवे कर्मियों के साथ स्थानीय ग्रामीण भी इसमें सहयोग करते थे. पूजा के अवसर पर छोटे स्तर पर मेले का आयोजन भी होता था.
विश्वकर्मा पूजा के दौरान आसपास के ग्रामीणों के साथ दूर-दराज से भी लोग स्टेशन परिसर पहुंचते थे. पूजा और मेले को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहता था. इस बार आयोजन नहीं होने से श्रद्धालुओं में निराशा है.
मेले से छोटे दुकानदारों को मिलता था रोजगार
स्थानीय लोगों ने बताया कि विश्वकर्मा पूजा के दौरान लगने वाले मेले में आसपास और दूर-दराज के छोटे दुकानदार दुकानें लगाते थे. इससे उन्हें कुछ दिनों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलता था और कई परिवारों का खर्च भी इससे चलता था.
इस वर्ष मेला नहीं लगने से इन छोटे दुकानदारों के सामने भी निराशा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, हर वर्ष मेले में लोगों की अच्छी-खासी भीड़ जुटती थी और पूजा के साथ छोटे व्यवसाय करने वालों को भी इसका लाभ मिलता था.
काली पूजा को लेकर भी लोगों में चिंता
विश्वकर्मा पूजा नहीं होने से नाराज स्थानीय लोगों ने स्टेशन परिसर में स्थित काली मंदिर को लेकर भी चिंता जतायी है. लोगों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही विश्वकर्मा पूजा और मेले पर रोक लगने के बाद अब उन्हें आशंका है कि कहीं भविष्य में स्टेशन परिसर में होने वाली काली पूजा को लेकर भी कोई प्रतिबंध न लगा दिया जाए.
हालांकि, काली पूजा को लेकर ऐसी किसी रोक के संबंध में रेलवे प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आयी है. स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से धार्मिक आयोजनों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
श्रद्धालुओं ने जतायी निराशा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि इससे आसपास के लोगों की सामाजिक भागीदारी और छोटे दुकानदारों को रोजगार का अवसर भी मिलता था. वर्षों पुरानी परंपरा के इस वर्ष टूटने से श्रद्धालुओं में निराशा है.
