साहिबगंज के मयंक चौधरी ने कर दिया कमाल, पहले ही प्रयास में IIT-JEE में हासिल की 680वीं रैंक

JEE Advanced Result: साहिबगंज के होनहार छात्र मयंक चौधरी ने IIT-JEE एडवांस्ड परीक्षा में पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 680 हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. इंजीनियर पिता के मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत के दम पर मिली इस सफलता ने युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

साहिबगंज से सुनील ठाकुर की रिपोर्ट

JEE Advanced Result: झारखंड के साहिबगंज जिले के होनहार छात्र मयंक चौधरी ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित आईआईटी-जेईई एडवांस्ड परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. मयंक ने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) 680 प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. जैसे ही परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई.

पहले ही प्रयास में मिली बड़ी सफलता

आईआईटी-जेईई एडवांस्ड देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. हर वर्ष लाखों छात्र इस परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन सीमित संख्या में ही विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर पाते हैं. ऐसे में मयंक चौधरी का पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 680 हासिल करना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. उनकी इस सफलता ने न केवल परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि साहिबगंज जिले के विद्यार्थियों के लिए भी एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की है.

बचपन से ही पढ़ाई में रहे अव्वल

पुरानी साहिबगंज निवासी मनोज चौधरी और कंचन देवी के पुत्र मयंक बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं. परिवार के लोगों के अनुसार उन्होंने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी और हर कक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया. मयंक की सफलता के पीछे उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण प्रमुख कारण रहे. उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान कभी भी कठिनाइयों को बाधा नहीं बनने दिया और लगातार अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते रहे.

पिता से मिली प्रेरणा और मार्गदर्शन

मयंक के चाचा मिथिलेश चौधरी, जो विशेष शाखा में एएसआई के पद पर कार्यरत हैं, ने बताया कि मयंक शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और समर्पित रहा है. उन्होंने कहा कि उसकी सफलता में उसके पिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. मयंक के पिता मनोज चौधरी पेशे से इंजीनियर हैं. उन्होंने बेटे को शुरू से ही बेहतर शिक्षा और सही मार्गदर्शन प्रदान किया. परिवार का सकारात्मक माहौल और पिता का अनुभव मयंक के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बना. इसी प्रेरणा ने उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की.

हैदराबाद से गाजियाबाद तक की शैक्षणिक यात्रा

मयंक की शैक्षणिक यात्रा भी काफी प्रभावशाली रही है. उन्होंने अपनी दसवीं की पढ़ाई हैदराबाद के भारती विद्या स्कूल से पूरी की. इसके बाद उच्च शिक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने गाजियाबाद में अध्ययन किया और वहीं से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. स्कूली शिक्षा के दौरान ही उन्होंने इंजीनियर बनने का सपना देखा था. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने आईआईटी-जेईई की तैयारी शुरू की और पूरी मेहनत तथा अनुशासन के साथ अध्ययन किया. उनकी यही मेहनत अब शानदार परिणाम के रूप में सामने आई है.

कठिन परिश्रम और अनुशासन बना सफलता का मंत्र

आईआईटी-जेईई जैसी परीक्षा में सफलता केवल प्रतिभा के आधार पर नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए लंबे समय तक निरंतर अध्ययन, आत्मविश्वास और समय प्रबंधन की आवश्यकता होती है. मयंक ने अपनी तैयारी के दौरान नियमित अध्ययन, विषयों की गहरी समझ और लगातार अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया. उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य व्यर्थ गतिविधियों से दूरी बनाकर अपना पूरा फोकस लक्ष्य पर केंद्रित रखा. यही कारण है कि उन्होंने पहले ही प्रयास में देशभर के लाखों विद्यार्थियों के बीच उत्कृष्ट रैंक हासिल की.

परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल

मयंक की इस उपलब्धि के बाद परिवार में उत्सव जैसा माहौल है. रिश्तेदारों, मित्रों और पड़ोसियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं. उनके चाचा मिथिलेश चौधरी के अलावा विशेष शाखा के डीएसपी प्रकाश टोप्पो, सहकर्मी गौतम सिंह, कुंदन कुमार रजक, अजीत भगत, नीरज पांडेय और पड़ोसी अरुण चौधरी ने भी मयंक की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की है. सभी ने इसे साहिबगंज जिले के लिए गर्व का क्षण बताया.

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जिले के विद्यार्थियों के लिए बने प्रेरणा

मयंक चौधरी की सफलता यह संदेश देती है कि किसी भी छोटे शहर या जिले से आने वाला छात्र भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है. जरूरत केवल सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास की होती है. उनकी उपलब्धि साहिबगंज सहित पूरे झारखंड के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है. मयंक ने साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने का जुनून हो, तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है. उनकी यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में कई छात्रों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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