गंगा का जलस्तर खतरे के पार, फरक्का समेत नदी किनारे के इलाकों के लिए निर्देश जारी

नेपाल-बिहार बारिश से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर. फरक्का समेत तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी, मछुआरों को रात में उतरने की मनाही.

फरक्का : नेपाल और बिहार में लगातार बारिश तथा गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए फरक्का सहित गंगा किनारे के इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है. गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद मुर्शिदाबाद और मालदा जिले के नदी किनारे बसे गांवों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश जारी किये गये हैं. प्रशासन ने रात के समय मछुआरों को गंगा नदी में नहीं उतरने की हिदायत दी है.

22.40 से बढ़कर 22.80 मीटर पहुंचा जलस्तर

जानकारी के अनुसार, फरक्का में गंगा का जलस्तर 22.40 मीटर से बढ़कर 22.80 मीटर तक पहुंच गया है. जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए फरक्का, समशेरगंज, सूती और रघुनाथगंज सहित गंगा किनारे के इलाकों में प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. संभावित परिस्थिति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बैठक भी की गई.

बीडीओ से मिले भाजपा नेता

इसी क्रम में भाजपा नेता सुनील चौधरी ने फरक्का के बीडीओ सुजीत व्यापारी से मुलाकात कर क्षेत्र की स्थिति की जानकारी ली और संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर चर्चा की.

11 लाख क्यूसेक तक पानी छोड़े जाने की संभावना

फरक्का बैराज जल संसाधन मंत्रालय के परियोजना महाप्रबंधक आरडी देशपांडे से प्राप्त जानकारी के हवाले से बताया गया है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए जरूरत पड़ने पर करीब 11 लाख क्यूसेक तक पानी छोड़ा जा सकता है. फिलहाल फरक्का में जलप्रवाह करीब 10 से 11 लाख क्यूसेक के आसपास बताया जा रहा है.

बांग्लादेश में जलस्तर खतरे के निशान से नीचे

दूसरी ओर, बांग्लादेश के चपाईनवाबगंज क्षेत्र में जलस्तर अभी खतरे के निशान से करीब 150 सेंटीमीटर नीचे बताया जा रहा है. पिछले 24 घंटे में वहां जलस्तर में लगभग 7 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है, जिसे फिलहाल सामान्य स्थिति के तहत देखा जा रहा है.

109 में अधिकांश गेट खुले

फरक्का बैराज के कुल 109 गेटों में से अधिकांश गेट खोले जाने की जानकारी सामने आयी है. वहीं, 24 और 25 नंबर गेट को आंशिक रूप से खोले जाने की बात कही गयी है. बताया गया है कि इन गेटों से निर्धारित सीमा के भीतर ही पानी का बहाव छोड़ा जाता है.

कोलकाता की ओर भेजा जाता है 40 हजार क्यूसेक पानी

फरक्का बैराज से फीडर कैनाल के जरिये कोलकाता की ओर अधिकतम करीब 40 हजार क्यूसेक पानी हुगली नदी में भेजा जाता है. शेष पानी गंगा-पद्म नदी के रास्ते बांग्लादेश की ओर बहता है.

ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों से सतर्क रहने, रात के समय नदी में नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन को तत्काल सूचना देने की अपील की है. प्रशासन ने बताया कि नेपाल और बिहार में बारिश की स्थिति तथा मानसून के दौरान गंगा में बढ़ने वाले जलप्रवाह को देखते हुए एहतियातन अलर्ट जारी किया गया है.


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By Bikash jaswal

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