बुद्ध पूर्णिमा पर राजमहल उत्तर वाहिनी गंगा में श्रद्धालुओं ने लगायी डुबकी

साफाहोड़ आदिवासी भी लगाया अखाड़ा, मां गंगा की भक्तों ने की पूजा-अर्चना

राजमहल. बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर हजारों आदिवासी एवं गैर आदिवासी श्रद्धालुओं ने सोमवार को राजमहल उत्तर वाहिनी गंगा घाट में आस्था की डुबकी लगायी. स्थानीय पुरोहितों ने कहा कि वैशाख मास के पूर्णिमा के मौके पर पवित्र गंगा स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है. वहीं जीवन में संपन्नता, सुख, समृद्धि एवं शांति की भी प्राप्ति होती है. वैशाख पूर्णिमा को भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था और इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. इसलिए इस दिन को विशेष रूप से बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. राजमहल अनुमंडल मुख्यालय सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्र के अलावे बरहरवा, बोरियों, तालझारी, बोआरीजोर, लिट्टीपाड़ा, आमड़ापाड़ा, काठीकुंड, गोपीकांदर, दुमका व गोड्डा से आये श्रद्धालुओं ने राजमहल के सूर्य देव घाट, गुदाराघाट, कालीघाट व महाजनटोली घाट में गंगा स्नान के बाद गंगा पूजन एवं स्थानीय मंदिरों में पूजा-अर्चना की. वहीं मां गंगा से की गयी मन्नतें पूरी होने पर कई लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया. साफा होड़ आदिवासियों ने अपने-अपने धर्मगुरु के साथ गंगा स्नान एवं पूजन किया. वहीं लोटा में जल भरकर गंगा तट पर अखाड़ा लगाते हुए मां गंगा मरांग गुरू रूपी भगवान शिव, भगवान श्रीराम की पूजा अर्चना कर आराधना की. शिष्यों के माध्यम से गुरु को अपने कष्ट की जानकारी देकर निवारण का आग्रह किया. वहीं गुरु ने बेंत की छड़ी से मां गंगा का आह्वान करते हुए कष्ट का निवारण किया. पूरे दिन शहर में अतिरिक्त वाहनों के प्रवेश होने से आवागमन अस्त-व्यस्त रहा. स्टेशन चौक एवं गांधी चौक में कई बार जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो गयी.

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Published by: Abdhesh singh

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