मंडरो. प्रखंड के तेतरिया पंचायत अंतर्गत तेतरिया गांव में स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित भागवत कथा में वृंदावन से आयी साध्वी साक्षी द्वारा भागवत कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव पर कथा सुनायी गयी. इस दौरान साध्वी ने कहा कि भगवान शिव और पार्वती का विवाह भव्यता के साथ हुआ था. पार्वती की तरफ से कई सारे उच्च कुलों के राजा-महाराजा और शाही रिश्तेदार शादी में शामिल हुए, लेकिन शिव की ओर से कोई रिश्तेदार नहीं था, क्योंकि वे किसी भी परिवार से ताल्लुक नहीं रखते. माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में पाया था. माता सती ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. सती के वियोग में शिव जी ध्यान में बैठे थे. एक दिन शिव जी के पास हिमाचल राज और उनकी पुत्री पार्वती पहुंचीं. पार्वती चाहती थीं कि उनका विवाह शिव जी से हो जाये. माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए 108 जन्मों तक घोर तपस्या की थी. शादी के बाद भी माता पार्वती ने एक आदर्श पत्नी की तरह कर्तव्य निभाये. इस अवसर पर कवि कुमार मंडल, हेमंत कुमार, पप्पू जायसवाल, शंकर मंडल सहित दर्जनों की संख्या में महिला एवं पुरुष कथा को सुन रहे थे.
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