मंडरो. भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण जीएसआइ के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर जीएसआइ राज्य इकाई झारखंड ने वन प्रमंडल पदाधिकारी के सहयोग से मंडरो फॉसिल्स पार्क में सोमवार को जीवाश्म जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान डीएफओ प्रबल गर्ग एवं जियोलाॅजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (जीएसआइ) के भारतीय सर्वेक्षण विभाग के भू वैज्ञानिक डॉ सौरभ पाल, डॉ अंजलि पाल, राजमहल मॉडल कॉलेज के भू वैज्ञानिक विभाग सह प्राचार्य डॉ रणजीत कुमार सिंह ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को राजमहल की पहाड़ी में पाये जाने वाले जीवाश्म के अवशेषों के बारे में ऑडिटोरियम के माध्यम से जानकारी दी गयी. छात्राओं को तालझारी के जामा मस्जिद के पास पत्थर के बने चावल के दाने के बारे में बताया गया. झारखंड के भू वैज्ञानिक सौरभ पाल ने राजमहल क्षेत्र में ज्वालामुखीय चट्टानों के निर्माण, इंटरट्रैपियन स्तरों में पाये जाने वाले वनस्पति जीवाश्म और प्रागैतिहासिक जैव विविधता को समझने में भूविज्ञान की भूमिका पर चर्चा की. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जीवाश्म और चट्टानों के सूक्ष्म अध्ययन से उनकी पहचान और वर्गीकरण में सहायता मिलती है. झारखंड जीएसआइ राज्य इकाई की भूवैज्ञानिक डॉ अंजलि पाल ने भूविज्ञान में कैरियर के अवसरों के बारे में जानकारी दी और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के कार्यों पर प्रकाश डाला. उन्होंने जीएसआइ के गौरवशाली इतिहास की भी चर्चा की, जो इस वर्ष अपनी 175वीं वर्षगांठ मना रही है. वहीं छात्राओं को जियोलॉजी पाठ के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी. राजमहल मॉडल कॉलेज के वैज्ञानिक सह प्राचार्य डॉ रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि यह 68वें विश्व वन्यजीव दिवस परिस्थांत्रिक तंत्र अर्थव्यवस्थाओं और मानव कल्याण को बनाये रखने में वन्यजीवों की अहम भूमिका होती है. इस अवसर पर मंडरो प्रभारी वन पाल राणा रणजीत चौधरी, वनरक्षी अंकित कुमार झा, तेतरिया विद्यालय के प्रधानाध्यापिका रूबी कुमारी, कन्या मध्य विद्यालय मंडरो के प्रधानाध्यापक पुष्कर कुमार के अलावा शिक्षक कमल नयन, मनोज कुमार मुर्मू, निर्मल महतो सहित दर्जनों की संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
