ग्राम प्रधानों को मिले पूर्ण अधिकार

दिसोम मांझी परगना वैसी की आम सभा में लाल हेंब्रम ने कहा दिसोम मांझी परगमना वैसी की आम सभा में आदिवासियों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया. अतिथियों ने जुटे आदिवासी समुदाय के लोगों से हक व अधिकार के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया. साहिबगंज : ग्राम प्रधान को मिले पूर्ण अधिकार. यह बातें […]

दिसोम मांझी परगना वैसी की आम सभा में लाल हेंब्रम ने कहा

दिसोम मांझी परगमना वैसी की आम सभा में आदिवासियों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया. अतिथियों ने जुटे आदिवासी समुदाय के लोगों से हक व अधिकार के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया.
साहिबगंज : ग्राम प्रधान को मिले पूर्ण अधिकार. यह बातें संताल परगना के अध्यक्ष इंगलिश लाल हेंब्रम ने रविवार को शहर के टाउन हॉल में आयोजित आम सभा में कही. उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान व परनैत प्रथा राज्य में पूर्ण रूप से लागू होना चाहिए. इसके पूर्व दिसोम मांझी परगना वैसी के बैनर तले रविवार को शहर के नगर भवन में आम सभा कर राज्य के उत्पन्न आदिवासियों की समस्याओं पर विचार किया गया. कार्यक्रम का विधिवत उदघाटन संताल परगना के अध्यक्ष सह प्रधान इंगलिश लाल हेंब्रम व सचिव मुंशी टुडू ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर उदघाटन किया.
वहीं आदिवासी रीति-रिवाज से अतिथियों का स्वागत किया गया. तत्पश्चात कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ. वहीं मंच का संचालन लाउस हांसदा ने किया. इस दौरान मंच संचालक द्वारा उपस्थित दिसोम मांझी परगना के सदस्यों को सभा में उपस्थित होने के लिए धन्यवाद दिया गया. कहा कि अपनी हक की लड़ाई के लिए एकजुट रहने की अपील की. वहीं सचिव मुंशी टुडू द्वारा कार्यक्रम की एजेंडा को प्रस्तुत किया. जिसमें सर्वप्रथम ग्राम प्रधानों का अधिकार क्या है, एसपीटी-सीएनटी क्या है, पंचायत अधिनियम क्या है, संताल साहित्य ने भाषा का विकास हेतु प्राथमिकता शिक्षा स्तर स्कूल में पढ़ाई होनी चाहिए. संताल आदिवासियों को जमीन कितना और कहा तक हो अधिकार, ग्राम प्रधान प्रथ व परनैत प्रथा लागू हो सहित कई विषयों को सभा के समक्ष रखा. वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सह प्रधान इंगलिश लाल हेंब्रम ने सभी विषय पर गहण चिंतन कर सभा को संबोधित करते हुये कहा कि सर्वप्रथम यदि संताली समाज को जमीन रहने देना है तो ग्राम प्रधान को पूर्ण अधिकार मिले. और हम आदिवासी समाज की प्रधान की मर्यादा को समझ कर उचित सम्मान दे साथ ही सरकार से भी हमारी मांग होगी की प्रधानी प्रथा को समाप्त होने न दे और पूर्ण अधिकार दे. राज्य की सरकार सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन कर संताल की अस्तित्व को समाप्त करने की दिशा में कार्य कर रही है. जिसे रोकना अति आवश्यक है. सीएनटी व एसपीटी एक्ट हमारा संविधान है. इससे छेड़छाड़ हम बरदाश्त नहीं करेंगे. पंचायत अधिनियम में हम आदिवासियों को पूर्ण अधिकार मिले. संताली साहित्य व भाषा तब ही संभव है जब इस विषय की पढ़ाई विद्यालयों में होगी. ग्राम प्रधान व परनैत प्रथा राज्य में पूर्ण रूप से लागू होना चाहिए. नायेक, गोंडेत, जोन माझी परानीक के सम्मानित राशि के लिये लागू करने की मांग पर चर्चा की गयी. इस अवसर पर मुंशी टुडू, कुटु मुर्मू, अनता टुडू सहित संताल परगना के सभी जिलों के प्रतिनिधि व दर्जनों सदस्य उपस्थित थे.

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