साहिबगंज से खासमहल की हो समाप्ति

प्रभात परिचर्चा. बुद्धिजीवियों व समाजसेवियों ने रखे अपने-अपने विचार, कहा साहिबगंज : प्रभात खबर कार्यालय में शनिवार को खासमहल मुद्दे को लेकर परिचर्चा का आयोजन किया गया. जिसमें शहर के चेंबर, अधिवक्ता, समाजसेवी, वुद्धिजीवी जुटे और सभी ने खासमहल को लेकर अपने-अपने विचार व्यवक्त किये. सभी ने खासमहल के प्रासंगिकता और इलाके के विकास को […]

प्रभात परिचर्चा. बुद्धिजीवियों व समाजसेवियों ने रखे अपने-अपने विचार, कहा

साहिबगंज : प्रभात खबर कार्यालय में शनिवार को खासमहल मुद्दे को लेकर परिचर्चा का आयोजन किया गया. जिसमें शहर के चेंबर, अधिवक्ता, समाजसेवी, वुद्धिजीवी जुटे और सभी ने खासमहल को लेकर अपने-अपने विचार व्यवक्त किये. सभी ने खासमहल के प्रासंगिकता और इलाके के विकास को लेकर अपने मतव्य से अवगत कराया.
शहर में 17 वार्ड कमेटी का गठन कर दिया गया है. लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ी जा रही है. खासमहल कानून समाप्त होना चाहिये.
– ललित स्वदेशी, संरक्षक खासमहल उन्मूलन समिति
खासमहल को समाप्त करने के लिए सभी को एकजुट होकर आंदोलन को तेज करना है. तभी न्याय मिलेगा.
– अनवर अली, सदस्य खासमहल उन्मूलन समिति
खासमहल से शहर को मुक्त कराने की मांग चेंबर कई वर्ष से करती आ रही है. गुलामी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं.
– चेतन भरतिया, अध्यक्ष साचेका
एक तरफ तो बेघर को प्रधानमंत्री आवास के जरिये घर उपलब्ध कराया जा रहा है. दूसरी तरफ जिनका पुस्तैनी घर है, सरकार द्वारा बकाये के कारण नीलामी में खरीदा गया है. अथवा जिन्होंने विक्रेता से खरीद कर घर बनाया है उसे उजाड़ने का प्रयास किया जाता रहा है.
– केशव तिवारी, सदस्य खासमहल उन्मूलन समिति
अधिग्रहण की गयी जवाहर नवोदय विद्यालय की जमीन के संबंध में उच्च न्यायालय रांची का कहा है कि यदि उक्त जमीन खासमहल की है तो उसमें जमाबंदी व खजाना रसीद कहां से आया. इससे साफ पता चलता है कि उक्त जमीन रैयती है.
– लाला पासवान, अधिवक्ता
जमाबंदी भी रैयतों के नाम है. सरकार को भी जमीन की जरूरत पड़ने पर उक्त जमीन रैयतों को मुआवजा का भुगतान कर भू अर्जन प्रक्रिया से अर्जित की जाती रही है.
– सुनील शर्मा, सचिव साचेका
खासमहल मेनुअल में साहिबगंज का कही जिक्र नहीं है, विधानसभा की उप समिति ने दिनांक 17 सितंबर 2013 को एवं विधानसभा की कार्यान्वयन समिति ने 25 अगस्त 2006 को दो-दो बार जांच कर अपने प्रतिवेदन में इसे नकारते हुए जनहित में समाप्त करने की अनुशंसा करते हुए विधानसभा के पटल पर रखा था.
– सिधेश्वर मंडल, समाजसेवी
महाधिवक्ता ने भी साहिबगंज खासमहल के संबंध में अपना मतव्य खासमहल के विरूद्ध ही दिया है, 1930 के पूर्व एवं बाद में उपरोक्त जमीन की रजिस्ट्री होती थी एवं माल गुजारी फरद रैयत जारी की जाती थी, पंजी में रैयतों के नाम दर्ज हैं.
– जय प्रकाश सिन्हा, समाजसेवी
भूखंड में गैर मजुरूआ आम और गैर मजरूआ खास भूखंड बरकरार है. जिस भूखंड के खासमहल होने की आज तक कोई अधिसूचना नही है. ऐसा भूखंड कभी भी खासमहल नहीं हो सकता है.
– गोपाल चोखानी, सदस्य खासमहल उन्मूलन समिति

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