प्रवासी पक्षियों का शिकार कर रहे चिड़ीमार

साहिबगंज : केंद्र व राज्य सरकार एक तरफ दुर्लभ पक्षियों की घट रही संख्या पर चिंता जाहिर कर रही है. वहीं जिले के राजमहल व उधवा इलाके में चिड़ीमार ने प्रवासी पक्षियों का शिकार कर रहे हैं. गुरुवार को साहिबगंज शहर के एनएच 80 सड़क किनारे एवं चर्च रोड, पुरानी साहिबगंज पथ व पूर्वी फाटक […]

साहिबगंज : केंद्र व राज्य सरकार एक तरफ दुर्लभ पक्षियों की घट रही संख्या पर चिंता जाहिर कर रही है. वहीं जिले के राजमहल व उधवा इलाके में चिड़ीमार ने प्रवासी पक्षियों का शिकार कर रहे हैं. गुरुवार को साहिबगंज शहर के एनएच 80 सड़क किनारे एवं चर्च रोड, पुरानी साहिबगंज पथ व पूर्वी फाटक सडक किनारे कई चिड़ीमार प्रवासी प्रक्षियों को बेचते देखे गये. राजमहल अनुमंडल क्षेत्र के उधवा पक्षी अभ्यारण केंद्र में लगभग चार सौ प्रजाति के पक्षी प्रवास करते हैं. इन पक्षियों में लालसर, कालसर, दिघौंच अधन्गा, चाहा, बघेर, चकवा आदि प्रवासी शामिल हे. चिडीमारों का जमावड़ा शहर के स्टेशन चौक, चौक बाजार, पूर्वी फाटक व जिरवाबाड़ी क्षेत्र के बीच ज्यादा होता है. पक्षियों को बेचने मे बच्चे व बूढ़े भी शामिल रहते हैं.

दुर्लभ पक्षियों को बेचना है अपराध
पर्यावरणविद डॉ रंजीत सिंह ने कहा कि दुर्लभ पक्षियों को बेचना कानूनन अपराध है. इसके लिए भारतीय कानून में सजा का प्रावधान है. इसमें सात साल की सजा, पच्चीच हजार रुपये का जुर्माना, राधानगर के तत्कालीन थानाध्यक्ष नवदेश्वर राय के कार्यकाल में तीन शिकारी को पकड़ कर जेल भेजा गया था. इससे पूर्व भी चार शिकारी को पक्षी सहित पकड़कर जेल भेजा गया था.
कहां से आते हैं पक्षी
दुर्लभ पक्षी रूस के साइबेरिया के जंगल सहित अन्य हिस्से तथा कजाकिस्तान, चीन , तिब्बत, लदाख के जंगलों से अक्तूबर माह में भारत के गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रजनन व विचरण के लिए आते हैं. अक्तूबर से फरवरी तक जंगलों में भीषण ठंड होती है. अक्तूबर से आने का सिलसिला शुरू होता है. मार्च के बाद प्रवासी पक्षी पलायन कर जाते हैं.

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