साहिबगंज : साहिबगंज पुलिस ने जिस सिद्दत से अपराधियों को पकड़ने में पूरी ताकत लगा दी है इससे साफ हो गया है कि अब इलाके के अपराधियों की खैर नहीं है. अपने योगदान के समय आरक्षी अधीक्षक पी मुरुगन ने कहा था कि इलाके के जितने भी मोस्ट वांटेंड हैं उनकी लिस्ट तैयार कर ली […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
साहिबगंज : साहिबगंज पुलिस ने जिस सिद्दत से अपराधियों को पकड़ने में पूरी ताकत लगा दी है इससे साफ हो गया है कि अब इलाके के अपराधियों की खैर नहीं है. अपने योगदान के समय आरक्षी अधीक्षक पी मुरुगन ने कहा था कि इलाके के जितने भी मोस्ट वांटेंड हैं उनकी लिस्ट तैयार कर ली गयी है.
या तो अपराधी सरेंडर करे या फिर पुलिस उन्हें हर हाल में धर दबोचेगी. हालांकि स्थानीय कुछ चिचोरे की मदद से पुलिस ने नजर चुराने वाले ये अपराधी अब पुलिस की पकड़ में आने लगे हैं. इलाके का सरदर्द कहा जाने वाला पीके उर्फ प्रकाश मंडल की गैंग पर एसपी अपनी पैनी नजर बनाये हुए हैं. पुलिस सूत्रों की मानें तो पंकज लाला तो पकड़ा गया अब पीके ग्रुप के असली सरगना की बारी है.
पीके गैंग के हर गुरगों व मददगारों पर नजर रख रही पुलिस
मुखबिरों से मदद ले रहा पीके
हालांकि पुलिस व स्थानीय सूत्रों की मानें तो पीके की सही पहचान ही नहीं हो पा रही है. जबकि कुछ सूत्रों की मानें तो राजमहल व साहिबगंज के इलाके में पीके के मुखबिरों की कमी नहीं है. जो पुलिस की गतिविधियों की खबर उसतक पहुंचाते हैं. पीके हमेशा से इसका लाभ उठाता रहा है.
जयराम पंडित भी इन मुखबिरों को सूचना पहुंचाने के लिए मोटी रकम खर्च करता था. राजमहल में कुछ लोग समाज में अच्छी पहचान रखने वाले लोग भी इनके मुखबिर हैं. कुछ माह पहले भी पुलिस इन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछाये थे. लेकिन राजमहल पुलिस ने हाथ समेट लिये. अब फिर एसपी इसपर सख्त हुए हैं. इन मुखबिरों के मोबाइल पर पूरी तरह नजर बनाये हैं.
प्रभाकर अब तक नहीं लिया जा सका रिमांड पर
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रभाकर मंडल राजमहल के चीनी मिट्टी उद्योग से रंगदारी वसूलने के लिये अपराध की दुनिया में कदम रखा था. बताया जाता है कि उसके रास्ते में जो भी आया उसका वह सफाया करता गया. पुलिस से बचने के लिये राजमहल के गंगा पार पश्चिम बंगाल के कलियाचक जो नदी के रास्ते 15 किमी है,
में अपना ठिकाना बनाया. राजमहल थाना में उसके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा हत्या, अपहरा, लूट सहित अन्य संगीन मामले दर्ज हैं. इसके अलावा बिहार के कटिहार और बंगाल के कलियाचक में भी मामले दर्ज है लेकिन वह कभी पकड़ा नहीं गया. प्रभाकर की छत्रछाया में ऋषिदेव अपराध की दुनिया में कदम रखा था.
फर्क यह था कि प्रभाकर झारखंड में अपना साम्राज्य चलाता था और ऋषिदेव पश्चिम बंगाल में. हालांकि प्रभाकर अभी मालदा की जेल में बंद है. झारखंड पुलिस अभी तक रिमांड पर नहीं ले पायी है.
पीके व प्रभाकर लाला के मुखबिर राजमहल इलाके में
जब वर्ष 2015 में प्रभाकर मंडल की गिरफ्तारी कलियाचक में हुई थी तो राजमहल पुलिस के कान में उन मुखबिरों के नाम आये थे जिसने प्रभाकर को चेन्नई में पुलिस के जाने की खबर दी थी. पुलिस महकमे में इन मुखबिरों की खूब चलती है. जो खबर को गाहे-बगाहे इन अपराधियों तक पहुंचाते हैं.
राजमहल के इलाके में उपजा पीके का आतंक
बिहार के कटिहार व पश्चिम बंगाल की सीमा से बिल्कुल सटे राजमहल अनुमंडल क्षेत्र में पीके उर्फ प्रकाश मंडल का आतंक उपजा था. पीके के तीन महत्वपूर्ण सहयोगी कुख्यात प्रभाकर मंडल, ऋषिकेश मंडल व पंकज लाला को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. एक काम और बचा है
प्रभाकर को बंगाल से ट्रांजिट रिमांड पर साहिबगंज लाना. जब प्रभाकर साहिबगंज पुलिस के कब्जे में होगा तो यहां कई पोल खुल जायेंगे. प्रभाकर व पंकज लाला का भी आपराधिक कैरियर राजमहल के इसी चायना क्ले के धंधों में पैदा हुआ था. जो धीरे धीरे नासूर बन गया.