साहिबगंज : सकरीगली समदा बंदरगाह के रैयतों का विस्थापन प्रशासन के लिए फिलहाल सिरदर्द बन गया है. इस अनसुलझे समस्या को सुलझाने के लिये पूरा जिला प्रशासन समदा के ग्रामीणों के साथ पूरे पांच घंटा तक माथापच्ची करते रहे. फिर भी कोई आसान रास्ता नहीं निकल पाया. जिस पर डीसी डॉ शैलेश कुमार चौरसिया ने आरएनआर समिति के साथ ग्रामीण प्रतिनिधि के रूप में तीन सदस्यों सहित एक कमेटी बना दी. जिसे यह जिम्मेदारी सौंपी गयी कि कमेटी सर्वे कर एक सर्वमान्य नीति बनायेंगे,
जिसके अनुसार प्रशासन सभी रैयतों का विस्थापन के साथ पुनर्वासन का कार्य कर सकेगी. अपर समाहर्ता अनमोल कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम फेज के 123 रैयतों को बंदरगाह निर्माण स्थल से विस्थापन का निर्देश सरकार से मिला है. जिसका पुन: सत्यापन प्रशासन को करना है. इसके लिये जिला प्रशासन द्वारा अधिग्रहित भूमि पर सभी रैयतों को बसाने का काम किया जाना है. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विनय मिश्र ने बताया कि जो मुआवजा राशि थी, वह सभी रैयतों को दी जा चुकी है.
अब आरएनआर के तहत 8.5 लाख रुपया व 5 डिसमिल भू-भाग का पट्टा रैयतों को दिया जा रहा है. इसी में रैयतों अब अपने परिवार के सभी बेटे व भाइयों को अलग-अलग राशि व भू-भाग का पट्टा देने का मांग कर रहा है. जो संभव नहीं है. इसके बाद भी डीसी ने यह विशेष आदेश दिये कि यदि कोई परिवार ऐसा कागजात दिखाता है जिससे यह पता चले कि उसमें कई और परिवार है जिसका कई अलग है, बिजली कनेक्शन अलग है, गेस का कनेक्शन अलग है तो ऐसे परिवार के लाभ दिया जा सकता है.
लेकिन जिनके पास कोई प्रमाण नहीं है तो ऐसे रैयतों को केवल एक परिवार को ही लाभ मिलेगा. इस पर भी रैयत नहीं माने और बाप मां का अलग व भाइयों का अलग-अलग पैकेज व भू-भाग के पट्टा की मांग की. जिस पर डीसी ने गांव के तीन लोग व आरएनआर के सदस्यों की एक कमेटी बना दी. जिस पर यह दायित्व सौंपा गया कि ये लोग ग्रामीणों से बात कर सर्वसम्मति से प्रस्ताव लेंगे.
इस पंचायत में डीसी डॉ शैलेश कुमार चौरसिया, अपर समाहर्ता अनमोल कुमार सिंह, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विनय कुमार मिश्र, सदर अंचल पदाधिकारी रामनरेश सोनी, समदा के मुखिया, शंभू दास, सत्यनारायण दास, रवींद्र रजक, सुरेश रजक, चतुरानंद मंडल सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे.
