चैत्र नवरात्र के दसवें दिन शनिवार की अहले सुबह मंदिरों में विजय दशमी की पूजा-अर्चना वैदिक मंत्रोचारण के साथ की गयी. शहर के भारतीय कला मंदिर सकरूगढ़ चैती दुर्गा मंदिर, रसूलपुर दहला चैती दुर्गा मंदिर, चौक बाजार दुर्गा मंदिर, जिरवाबाड़ी तुरी टोला चैती दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा का पूजन किया गया. इस दौरान महिलाओं ने मां दुर्गा को दही-चूड़ा का भोग लगाकर खोयचा चढ़ाकर, सिंदूर लगाकर, अपराजिता पूजन करके मां दुर्गा को विदा किया. हवन पूजन भी किया गया. ढोल नगाड़ा गाजे बाजे के साथ मंदिर से कलश निकालकर मुख्य मार्ग होते हुए स्थानीय गंगा तट पहुंचकर कलश विसर्जन किया गया. आचार्य रंजय शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा का आगमन पालकी पर हुआ, जो सामान्य या मिश्रित फलदायी माना जाता है. वही माता रानी का प्रस्थान हाथी पर हुआ, जो शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. मां दुर्गा जब विदा हो रही थी तो साक्षात हाथी महाराज आंधी बारिश के साथ आकर मां दुर्गा को अपने साथ लेकर प्रस्थान हुए. भक्त मंदिर पहुंचकर मां दुर्गा का दर्शन पूजन किया. मेले में लगे फास्ट फूड, आइसक्रीम, चाट, गोलगप्पे, घरेलू सामग्री, खिलौने खरीद रहे हैं. मेले का आनंद उठा रहे हैं.