रांची से मनोज कुमार सिंह की रिपोर्ट
World Milk Day 2026, रांची: झारखंड में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा खाका तैयार किया है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि वर्तमान में राज्य के 70 हजार से अधिक किसान झारखंड मिल्क फेडरेशन (JMF) से सीधे जुड़े हुए हैं और यह कुनबा लगातार बढ़ रहा है. सरकार ने अब वित्तीय वर्ष 2028-29 तक राज्य में दूध संग्रहण (Milk Collection) को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यभर में दुग्ध प्रसंस्करण अवसंरचना (Milk Processing Infrastructure) का तेजी से विस्तार किया जा रहा है.
दुग्ध संग्रहण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
पशुपालन मंत्री ने जेएमएफ की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सीमित समय में फेडरेशन ने राज्य के भीतर बेहतरीन काम किया है. आंकड़ों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का औसत दुग्ध संग्रहण 2.40 लाख लीटर प्रतिदिन दर्ज किया गया था. दुग्ध उत्पादक किसानों की मेहनत के बदौलत यह ग्राफ अब बढ़कर 2.80 लाख लीटर प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया है.
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गिरिडीह और सरायकेला-खरसावां में नए प्लांट
राज्य की दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने और दूध की बर्बादी रोकने के लिए बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा रहा है. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि झारखंड के गिरिडीह और सरायकेला-खरसावां जिलों में दो नए डेयरी संयंत्र (Plants) स्थापित किए जा रहे हैं. रांची के हॉटवार में एक अत्याधुनिक मिल्क पाउडर प्लांट और प्रोडक्ट डेयरी प्लांट की स्थापना की जा रही है. इन नई परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से राज्य के डेयरी किसानों को दूध बेचने के लिए एक बड़ा और स्थानीय बाजार उपलब्ध होगा, जिससे आने वाले दिनों में उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी.
किसानों को मिल रहा है 5 रुपये प्रति लीटर का सीधा बोनस
मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों के कारण ही आज ग्रामीण क्षेत्रों में लोग तेजी से दुग्ध उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं. सरकार द्वारा जेएमएफ से जुड़े दुग्ध उत्पादक किसानों को 5 रुपये प्रति लीटर की दर से प्रोत्साहन राशि (बोनस) सीधे प्रदान की जा रही है. इस आर्थिक मदद की वजह से ही बड़ी संख्या में नए किसान और युवा पारंपरिक खेती के साथ-साथ डेयरी गतिविधियों को रोजगार के रूप में अपना रहे हैं.
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