रांची में महिलाओं के भूमि अधिकार पर मंथन, जमीन में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान की मांग

रांची में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला में महिलाओं के भूमि पर अधिकार को लेकर चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने महिलाओं को जमीन का कानूनी अधिकार देने और इस दिशा में मजबूत प्रावधानों की आवश्यकता पर जोर दिया.

रांची. महिलाओं को आज भी भूमि पर अपेक्षा के अनुरूप अधिकार नहीं मिला है. महिलाओं को जमीन में हिस्सेदारी कैसे मिले और उनके भूमि अधिकार को कैसे मजबूत किया जाये, इस मुद्दे पर शुक्रवार को राजधानी रांची में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गयी. वीबीनेट, लैंडसा और ग्राम नियोजन केंद्र के सहयोग से 'महिलाएं और भूमि : आज की वास्तविकताएं एवं भविष्य की प्राथमिकताएं' विषय पर आयोजित कार्यशाला में सीएसओ सदस्य, सरकारी कर्मी और ग्रामीण शामिल हुए. इसमें महिलाओं को भूमि पर अधिकार दिलाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया गया.

महिलाओं को जमीन का कानूनी अधिकार देने पर जोर

संताल परगना की सामाजिक कार्यकर्ता बिटिया मुर्मू ने कहा कि महिलाएं आज भी समाज के एजेंडे में नहीं हैं. ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित करने की घटनाएं जारी हैं. जनजातीय समाज में महिलाओं के सामने आज भी कई चुनौतियां हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने कहा कि महिलाओं को जमीन में अधिकार दिलाने के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान जरूरी हैं. केवल अधिसूचना जारी कर अधिकार देने से स्थायी समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अधिकारी बदलने के साथ ऐसे फैसले खत्म हो जाते हैं.

दादा-परदादा के नाम पर दर्ज है जमीन

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के शिवशंकर ने कहा कि आज भी कई जगह सादा पट्टा पर काम हो रहा है. झारखंड में जमीन का खतियान अब भी दादा-परदादा के नाम पर है. सर्वे नहीं होने के कारण जमीन अगली पीढ़ी के नाम नहीं हो पा रही है.

लैंडसा संस्था के साउथ एशिया सलाहकार पिनाकी हलधर ने कहा कि महिलाओं को जमीन पर अधिकार कैसे मिले, यह महत्वपूर्ण मुद्दा है. लैंडसा 55 देशों में इस विषय पर काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि बंगाल में 50 लाख महिलाओं को भूमि से जुड़ी जानकारी दी गयी है.

प्रदान की झारखंड प्रमुख बाला देवी ने कहा कि महिला और जमीन का संबंध महत्वपूर्ण है. झारखंड में बड़ी संख्या में महिलाएं खेती का काम करती हैं, लेकिन उनके नाम पर जमीन कम है.

कार्यक्रम का संचालन वीबी नेट फाउंडेशन के विवेक राय ने किया.

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By Manoj Kumar Singh

मनोज सिंह प्रभात खबर में बतौर मुख्य संवाददाता कार्यरत है. पत्रकारिता में उनका 26 साल का अनुभव है. दैनिक हिन्दुस्तान में करीब आठ साल काम करने के बाद वह प्रभात खबर से जुड़े हैं. कृषि, पशुपालन, सहकारिता, वन, जलवायु परिवर्तन, आजीविका, मनोरोग, कोयला संबंधी खबरों में वर्षों काम करने का अनुभव है.

आइआइटी कानपुर से जस्ट ट्रांजिशन विषय पर फेलोशिप प्राप्त करने वाले देश के पहले संवाददाता है. उनको दो बार एग्रई जर्निलिज्म अवार्ड मिल चुका है. झारखंड सरकार के वन विभाग से तिलका मांझी अवार्ड मिला है. कई मचों पर वह प्रभात खबर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा ले चुके हैं.


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