बिपिन सिंह की रिपोर्ट
Snake Bite News: भारत में हर साल सर्पदंश के 30 से 40 लाख मामले दर्ज होते हैं, जबकि 58000 लोगों की मृत्यु सर्पदंश से होती है. इधर, झारखंड में हर साल जून से सितंबर के बीच सर्पदंश के सर्वाधिक मामले सामने आते हैं. सर्पदंश का एकमात्र इलाज है मरीज को समय रहते एंटीवेनम इंजेक्शन देना, लेकिन झारखंड के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में आज भी लोगों में इसे लेकर जागरूकता की कमी है. लोग सांप के डंसने के बाद अंधविश्वास में पड़ कर झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी से उपचार को प्राथमिकता देते हैं. इससे सर्पदंश के शिकार व्यक्ति को अस्पताल में पहुंचने में देर हो जाती है और यही उसकी मौत का कारण बनता है. पिछले साल सिमडेगा जिले में सर्पदंश से सर्वाधिक 10 और लातेहार में नौ मौतें दर्ज की गयीं. सरकार का मुख्य फोकस सर्पदंश के शिकार लोगों को समय रहते अस्पताल पहुंचाना और ग्रामीण स्तर पर फैले अंधविश्वास को जागरूकता अभियान के जरिये दूर करना है, ताकि साल 2030 तक सर्पदंश से होनेवाली मौतों को आधा किया जा सके. इसी के मद्देनजर राज्य में 'नेशनल स्नेक बाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल गाइडलाइन' के पालन को आवश्यक कर दिया गया है. साथ ही बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं के बढ़ने की आशंका के तहत मेडिकल कॉलेजों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अनुमंडल अस्पतालों और रेफरल अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम सिरम इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.
सांप डंसे तो क्या करें?
झारखंड में सांपों की करीब 250 प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें केवल 25% ही जहरीली है. सांप डंसे तो तो ये काम करें.
- सांप डंसे तो झाड़-फूंक कराने के बजाय पीड़ित को नजदीकी अस्पताल ले जायें
- मरीज को एंबुलेंस से स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए डायल-108 पर कॉल करें
- कोशिश करें कि पीड़ित को जल्द से जल्द एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लग जाये
- सर्पदंश के शिकार व्यक्ति को सोने नहीं दें और न ही उसे खड़ा होकर रहने दें
- मरीज का डर कम करने का प्रयास करें, कहें कि दवा देने से वह ठीक हो जायेगा
- जिस जगह सांप ने डंसा है, उसे रुमाल से कसकर बांधें, जहर मुंह से नहीं खींचें
- किसी भी स्थिति में स्नेक बाइट वाली जगह पर चीर न लगायें, इससे जहर फैलता है
- जहां सांप ने काटा है, वहां तेज धारा से पानी मारे ताकि विष निकल जाये
- अगर सांप ने हाथ में डंसा हो, तो हाथ फोल्ड कर फ्रैक्चर जैसा लटकाएं
- पीड़ित का बीपी नियंत्रित रखें, बीपी जितना बढ़ेगा, जहर उतनी तेजी से फैलेगा
झारखंड के साल दर साल बढ़ते मामले
| साल | सर्पदंश के मामले | मौतें |
| 2022 | 392 | 0 |
| 2023 | 1647 | 15 |
| 2024 | 2760 | 22 |
| 2025 | 4078 | 26 |
| 2026 (अब तक) | 561 | 0 |
राज्य सरकार ने सर्पदंश को 'अधिसूचित रोग' घोषित किया
झारखंड में मॉनसून की दस्तक और उमस भरी गर्मी के साथ ही ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. है. इसे देखते हुए राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश को 'अधिसूचित रोग' (नोटिफिएबल डिजीज) के रूप में अधिसूचित कर दिया है. इसके तहत अब सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को हर 15 दिन में सिविल सर्जन को सर्पदंश के मामलों की रिपोर्ट देनी होगी. वहीं, राज्य के भीतर काम करनेवाले सभी सरकारी, निजी, कॉर्पोरेट, रेलवे, सेना और आयुष अस्पतालों के साथ-साथ सभी डायग्नोस्टिक लैब्स को भी सर्पदंश के मरीजों का 15 दिनों पर डाटा जिला स्वास्थ्य प्राधिकार को सौंपना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है.
सांप के जहर से ज्यादा घबराहट से खतरा
मॉनसून के दौरान खेतों के बिलों में पानी भर जाता है. मिट्टी के अंदर बने भूमिगत बिलों से चूहे, मेंढक व छोटे कीट-पतंग बाहर निकलते हैं और सांप इनका शिकार करते हैं. इन सब के बीच इंसान के आने के बाद स्थिति जानलेवा बन जाती है. झारखंड में सांपों की 250 से अधिक प्रजातियां पायी जाती हैं. इनमें से केवल 25 प्रतिशत ही विषैली होती हैं. इसके बावजूद अक्सर सर्पदंश के शिकार लोग घबरा जाते हैं. स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सर्पदंश के कई मामलों में ज्यादा घबराहट की वजह से हृदय गति रुकने के कारण भी लोगों की मौत हो जाती है. वहीं, उपचार में देरी और काटनेवाले सांप की सही पहचान नहीं करना भी मौत की वजह होती है.
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