रांची. राज्य के सभी 24 जिलों की जल जांच प्रयोगशालाओं में पानी की गुणवत्ता जांचने की क्षमता का दायरा बढ़ाया गया है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की नयी योजना के तहत अब पानी की गुणवत्ता की पहले से अधिक बारीकी से जांच की जायेगी. इसके तहत रासायनिक मानकों की जांच क्षमता 12 से बढ़ाकर 15 तत्वों की कर दी गयी है. यानी तीन नये तत्वों को जांच के दायरे में शामिल किया गया है. इसके साथ ही बैक्टीरियोलॉजिकल जांच को भी शामिल किया गया है.
विभाग ने 21 जिला स्तरीय जल जांच प्रयोगशालाओं को एनएबीएल की मान्यता दिलाने का लक्ष्य रखा है. पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए पीएच, टर्बिडिटी, कुल घुलित ठोस, कठोरता, क्लोराइड, आयरन, फ्लोराइड, नाइट्रेट, सल्फेट, अवशिष्ट क्लोरीन और अमोनिया समेत प्रमुख रासायनिक एवं भौतिक मानकों की जांच की जाती है. इनसे पानी की शुद्धता, खनिजों की मात्रा और संभावित रासायनिक प्रदूषण का पता लगाने में मदद मिलती है.
29,404 गांवों में जलसहिया करेंगी जांच
राज्य के सभी 29,404 गांवों की जलसहियाओं को फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध कराया गया है. इसके माध्यम से स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में महीने में एक बार पेयजल के रासायनिक अवयवों की जांच की जा सकेगी.
क्या है बैक्टीरियोलॉजिकल जांच
बैक्टीरियोलॉजिकल जांच प्रयोगशाला में की जाने वाली प्रक्रिया है. इसके माध्यम से पानी या किसी अन्य नमूने में बैक्टीरिया की मौजूदगी, उनकी संख्या और प्रकार का पता लगाया जाता है. पानी की गुणवत्ता जांच में यह प्रक्रिया बैक्टीरियोलॉजिकल संदूषण की पहचान में मदद करती है.
