किसानों की मेहनत पर भारी पड़ रहा जल संकट

प्रगतिशील किसान मनोज कुमार अपनी कड़ी मेहनत से खेती में कामयाबी का नया रास्ता दिखा रहे हैं.

खलारी. खलारी प्रखंड की चुरी दक्षिणी पंचायत अंतर्गत ग्राम होयर के प्रगतिशील किसान मनोज कुमार अपनी कड़ी मेहनत से खेती में कामयाबी का नया रास्ता दिखा रहे हैं, लेकिन सिंचाई के साधनों की कमी उनकी तरक्की में बड़ी रुकावट बनी हुई है. आधुनिक खेती के जरिए क्षेत्र के लिए मिसाल पेश कर रहे मनोज वर्तमान में लगभग 70 डिसमिल जमीन पर खीरा, बैगन, करेला और कद्दू जैसी गरमा फसलें उपजा रहे हैं. हालांकि, क्षेत्र की पठारी भौगोलिक स्थिति और गिरते जलस्तर के कारण उनके कुएं सूखने लगे हैं. किसान मनोज का कहना है कि यदि उन्हें डीप बोरिंग की सुविधा मिल जाये, तो वे अपनी पूरी 10 एकड़ भूमि पर बड़े पैमाने पर जैविक खेती कर सकते हैं. सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था न होने से हाल ही में उन्हें जरबेरा फूलों की फसल सूखने के कारण 80 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है.

पठारी इलाके में सिंचाई किसान के लिए बनी चुनौती

होयर गांव का इलाका पठारी होने के कारण यहां सामान्य कुओं में पानी का स्रोत तेजी से घट रहा है. बढ़ती गर्मी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. किसान मनोज, अमृत, रमेश सहित कई किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से सीएसआर या डीएमएफटी मद से डीप बोरिंग कराने की गुहार लगायी है.

सरकारी सहायता और बुनियादी सुविधाओं की मांग

किसान मनोज कुमार ने बताया कि उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड और उद्यान विकास योजना के जरिए उन्नत बीज और सरकारी लोन का लाभ मिल रहा है, जिससे उन्हें खेती में काफी मदद मिली है. वे पूरी तरह से जैविक खेती पर जोर देते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता अच्छी होती है. हालांकि, जल संकट के साथ-साथ खलारी क्षेत्र में बड़ी मंडी और कोल्ड स्टोरेज का न होना उनके लिए एक बड़ी समस्या है.

क्षेत्र में सिंचाई के लिए डीप बोरिंग की दरकार

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By Dinesh pandey

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