Political news : झारखंड के लिए कोयला महत्वपूर्ण, पर इसके विकल्प पर सोचने का है समय : जर्मन राजदूत

रांची में झारखंड सरकार और जीआइजेड के सहयोग से कोल टू कम्युनिटी : इंडो जर्मन-डायलॉग का आयोजन.

रांची. भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ फिलिप एकरमैन ने कहा कि झारखंड के लिए कोयला महत्वपूर्ण है. यहां कोयले का बड़ा भंडार है. लेकिन, ग्रीन ऊर्जा आज की जरूरत है. हम ग्रीन सस्टेनेबल डेवलपमेंट (हरित स्थायी विकास) की बात कर रहे हैं. यह जरूरी भी है. इस कारण झारखंड को भी कोयले के विकल्प पर सोचने का समय है. जर्मनी पिछले 40-50 वर्षों से इस दिशा में काम कर रहा है. यह एक दिन का काम नहीं है. वे बुधवार को रांची में झारखंड सरकार और जीआइजेड के सहयोग से आयोजित कोल टू कम्युनिटी : इंडो जर्मन-डायलॉग में बोल रहे थे. डॉ एकरमैन ने कहा कि कोयला आधारित ऊर्जा प्रदूषण करती है. इसका नुकसान है. 80 के दशक में जर्मनी ने इस पर सोचना शुरू किया. अब इसका परिणाम वहां दिख रहा है. हम लोगों ने यह काम कैसे किया, यह झारखंड की टीम जाकर देख सकती है. उस मॉडल को झारखंड में अपनाया जा सकता है.

चुनौती से मिलकर निपटना होगा

जीआइजेड की कंट्री डायरेक्टर डॉ जूली रिवियर ने कहा कि हमें अलग इको सिस्टम, कृषि, मोबिलिटी और आधारभूत संरचना पर भी सोचना होगा. मैनपावर को स्किल करना होगा. नये उद्यम विकसित करने होंगे. सरकार के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारना होगा. तकनीक बढ़ानी होगी. यह चीजें, अकेले नहीं हो सकती है. इस चुनौती से मिलकर निपटना होगा.

2027 तक 17.5 बिलियन यूरो डॉलर खर्च करने की योजना

यूरोपियन यूनियन इंडिया और भूटान के मिनिस्टर काउंसलर थॉमस मैकलॉगन ने कहा कि यूरोपियन यूनियन 27 देशों का मजबूत संगठन है. हम मिलजुल कर काम करते हैं. पर्यावरण में हो रहा बदलाव बड़ा मुद्दा है. इस पर हम गंभीरता से चर्चा करते हैं. इसी में हमने 2025 तक कार्बन न्यूट्रिलिटी (शून्य कार्बन उत्सर्जन) तय किया है. इसके लिए पैसे की जरूरत होगी. यूनियन ने मिलकर 2021 से 2027 तक जस्ट ट्रांजिशन फंड पर 17.5 बिलियन यूरो डॉलर का फंड रखा है. इसे जस्ट ट्रांजिशन से प्रभावित लोगों पर खर्च करने की योजना है. इसके लिए सही दिशा में सोचने की जरूरत है.

दूसरों के लिए पथ प्रदर्शक बन सकता है झारखंड

झारखंड जस्ट ट्रांजिशन टास्क फोर्स के चेयरमैन एके रस्तोगी ने कहा कि बदलाव को हमेशा नकारात्मक रूप में लिया जाता है. कोयला आधारित ऊर्जा को कम करने का सबसे अधिक असर झारखंड पर पड़ेगा. यहां 18 जिलों में कोयला आधारित अर्थव्यवस्था है. इसको बदलना चुनौतीपूर्ण काम है. लेकिन, संभावना बहुत बड़ी है. अगर हम इस दिशा में कुछ अच्छा कर पाये, तो दूसरों के लिए पथ प्रदर्शक हो सकते हैं.

सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है : सचिव

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्रीनिवासन ने कहा कि झारखंड सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है. लेकिन, इसकी कई चुनौतियां है. झारखंड में कुल भूमि का 30 फीसदी पर वन है. जनजातीय की सुरक्षा के लिए एसपीटी और सीएनटी एक्ट है. यह विकास की रूपरेखा तय करने में एक चुनौती है. इसके बावजूद सरकार ने कई ऐसे प्रयास किये हैं, जिसका असर दिख रहा है. इस मौके पर सीड संस्था के सीइओ रमापति कुमार ने भी अपने विचार रखे.

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Published by: Rajiv kumar

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