Ranchi News : झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के तीन लेखकों को मिला जयपाल जुलियस हन्ना पुरस्कार

झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के तीन युवा लेखकों को जयपाल जुलियस हन्ना साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

आदिवासियत और भाषाई विविधता को सेलीब्रेट करने का अवसर : डॉ स्नेहलता

रांची. झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के तीन युवा लेखकों को जयपाल जुलियस हन्ना साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह सम्मान समारोह प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन और टाटा स्टील फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मोरहाबादी स्थित टीआरआई के सभागार में हुआ. साहित्यकारों को सम्मान मिला उनमें अरुणाचल प्रदेश के ओलो (नोक्ते) समुदाय के सोनी रूमछू को उनके कविता संग्रह- वह केवल पेड़ नहीं था के लिए, जमशेदपुर के हो समुदाय के काशराय कुदादा को निबंध संग्रह- दुपुब दिषुम के लिए और साहेबगंज बरहेट के मनोज मुर्मू को संताली कविता संग्रह- मानवा जीयोन के लिए पुरस्कार दिया गया. मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ स्नेहलता नेगी ने कहा कि यह समारोह गौरव और आत्मसम्मान का विषय है. यह आदिवासियत और भाषाई विविधता को सेलीब्रेट करने का भी अवसर है. उन्होंने कहा कि यह सच है कि हम आदिवासी अगर अपनी बात खुद नहीं कहेंगे तो और कौन कहेगा? झारखंड से हम सभी प्रेरणा ले सकते हैं कि यहां आदिवासी समुदाय के लेखक बुद्धिजीवी अपनी भाषाओं में लेखन कर रहे हैं और नये रचनाकारों को अवसर दे रहे हैं. यह महत्वपूर्ण कार्य है जो आदिवासियों की विश्वदृष्टि, उसकी भाषा, संस्कृति को बचाने के लिए है.प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन की वंदना टेटे ने पुरस्कारों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा, जुलियस तिग्गा और हन्ना बोदरा तीनों ही झारखंड के आदिवासी समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण शख्शियत हैं. उनके नाम पर आज जिन रचनाकारों को सम्मानित किया जा रहा है वे प्रेरित होंगे. वंदना टेटे ने कहा कि आदिवासियों को अपने बारे में खुद ही लिखना चाहिए तभी यह एकतरफा संवाद खत्म होगा. सम्मानित होनेवाले रचनाकारों ने भी अपनी बातें रखी. अरुणाचल प्रदेश के सोनी रूमछू ने कहा कि पहली बार इस तरह के मंच पर आने और सम्मानित होने का अवसर मिला है. इससे वे काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. कार्यक्रम में अश्विनी पंकज, टाटा स्टील फाउंडेशन के शिवशंकर कांडियोम ने भी बाते रखी. कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रीतिरंजन डुंगडुंग ने किया. कार्यक्रम के दूसरे सत्रों में बहुभाषाई कविता पाठ भी हुआ.

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By Munna kumar singh

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