समावेशी शिक्षा को मिलेगी नई दिशा, रांची के रातू में NIPID दिशा पाठ्यक्रम पर तीसरे बैच का प्रशिक्षण शुरू

रांची के रातू में बौद्धिक और विकासात्मक दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए NIPID दिशा पाठ्यक्रम पर शिक्षकों के लिए चार दिवसीय प्रशिक्षण का तीसरा बैच शुरू हुआ है. यह प्रशिक्षण समावेशी शिक्षा को मजबूत करेगा.


रांची: झारखंड में बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है. प्रखंड स्तरीय साधनसेवी रिसोर्स शिक्षकों और थेरेपिस्टों के लिए "NIPID दिशा पाठ्यक्रम" पर चार दिवसीय सेवाकालीन प्रशिक्षण के तीसरे बैच की शुरुआत मंगलवार को JCEERT, रातू में हुई. यह प्रशिक्षण 15 से 18 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें समावेशी शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और थेरेपिस्टों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा.

दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर रहेगा विशेष फोकस

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक एकरूप, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाना है. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ऐसे शिक्षण तरीकों और व्यावहारिक कौशल की जानकारी दी जाएगी, जिससे वे अपने-अपने प्रखंडों में बच्चों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक सहयोग प्रदान कर सकें.

NIPID नोएडा के प्रशिक्षक दे रहे प्रशिक्षण

प्रशिक्षण का संचालन भारत सरकार के राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIPID), सिकंदराबाद के क्षेत्रीय संस्थान, नोएडा के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है. विशेषज्ञ प्रतिभागियों को बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता से जुड़े विभिन्न पहलुओं, शिक्षण पद्धतियों और पुनर्वास आधारित दृष्टिकोण की जानकारी दे रहे हैं, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में इन विधियों का प्रभावी उपयोग कर सकें.

CRC रांची के समन्वय से हो रहा आयोजन

इस प्रशिक्षण का आयोजन NIPID सिकंदराबाद द्वारा CRC रांची (समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र) के समन्वय से किया जा रहा है. प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न प्रखंडों से आए साधनसेवी रिसोर्स शिक्षक और थेरेपिस्ट भाग ले रहे हैं, जो प्रशिक्षण के बाद अपने क्षेत्रों में समावेशी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में योगदान देंगे.

चार दिन तक चलेगा सत्र

15 से 18 सितंबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह के सत्र आयोजित किए जाएंगे. प्रतिभागियों को दिव्यांग बच्चों की सीखने की जरूरतों की पहचान, शिक्षण सामग्री के उपयोग और प्रभावी शिक्षण रणनीतियों पर प्रशिक्षित किया जाएगा.

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समावेशी शिक्षा को मिलेगी मजबूती

राज्य प्रभारी समावेशी शिक्षा अरविंद कुमार ने बताया कि इस तरह के सेवाकालीन प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना और समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर पर अधिक मजबूत बनाना है. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने प्रखंडों में बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांग बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे राज्य में समावेशी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.

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By Rana pratap

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